सुरक्षा परिषद: अपार अवसरों व गम्भीर जोखिमों के बीच, ‘ग़ाज़ा एक अहम मोड़ पर है’

ग़ाज़ा पट्टी एक ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर आ खड़ा हुआ है, जो उसके लिए बेहतर भविष्य के रास्ते खोल सकता है, लेकिन अपार अवसरों और गम्भीर जोखिमों से भरे इस क्षण में सजगता बनाए रखना भी ज़रूरी है. मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की एक अहम बैठक को सम्बोधित करते हुए यह चेतावनी जारी की है. 

15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व मे हालात पर चर्चा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें ग़ाज़ा में शान्ति स्थापना की योजना और उसमें अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा स्थापित ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ पर चर्चा होने की उम्मीद है.

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ग़ाज़ा में युद्धविराम के बीच मानवीय संकट और विशाल राहत आवश्यकताएँ बरक़रार हैं, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में उथलपुथल है और पूर्वी येरूशलम में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) के मुख्यालय को हाल ही में ध्वस्त किया गया है.

यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने प्रतिनिधियों को बताया कि ग़ाज़ा के समक्ष विशाल अवसर हैं, लेकिन साथ ही जोखिम भी बरक़रार हैं. “हम अपने सामने, ग़ाज़ा के लिए बदलाव का एक सम्भावित मोड़ देखते हैं, एक बेहतर भविष्य के लिए एक वास्तविक अवसर.”

मगर, “हम क़ाबिज़ पश्चिमी तट में निरन्तर बिगड़ते हालात को भी देखते हैं, और तनाव में धँसा हुए एक क्षेत्र.”

7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इसराइल में हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों के आतंकी हमलों के बाद, इसराइली सैन्य बलों ने बड़े पैमाने पर ग़ाज़ा में अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें जान-माल की भीषण क्षति हुई और एक गहरा मानवीय संकट उपजा.

शान्ति योजना

अक्टूबर 2025 में, इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम लागू किया गया, और अब संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित की गई 20 सूत्री योजना का दूसरा चरण, ग़ाज़ा में युद्धविराम को मज़बूती देने की दिशा में एक अहम पड़ाव बताया गया है. 

इस दौरान, ‘शान्ति बोर्ड’ (Board of Peace) और ग़ाज़ा में प्रशासनिक मामलों के लिए एक राष्ट्रीय समिति व उच्च प्रतिनिधि कार्यालय स्थापित किए गए हैं.

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए विशेष उप समन्वयक ने सुरक्षा परिषद में बताया कि उन्होंने मिस्र की राजधानी काहिरा में नई राष्ट्रीय समिति से यह विचार-विमर्श किया कि ग़ाज़ा में अहम सार्वजनिक सेवाओं, मानवीय सहायता के वितरण और ग़ाज़ा में पुनर्निर्माण की ज़मीन तैयार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र किस प्रकार से अपना समर्थन दे सकता है.

“हमारे पास एक विशाल ज़िम्मेदारी है.” इस क्रम में, उन्होंने सभी हितधारकों के साथ पूर्ण समन्वय की अहमियत पर बल दिया, जिसमें मौजूदा व्यवस्थाओं क्षमताओं के अनुरूप क़दम बढ़ाने होंगे.

युद्धविराम योजना का दूसरा चरण

रमीज़ अलकबरोव ने ग़ाज़ा में अन्तिम इसराइली बन्धक का शव लौटाए जाने का स्वागत किया. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पूर्ण सदभाव के साथ शान्ति योजना के दूसरे चरण को लागू किया जाना होगा. 

उन्होंने बताया कि ग़ाज़ा पट्टी का असैन्यीकरण, एक अति-आवश्यक शर्त है, और एक स्थिरतापूर्ण भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ग़ाज़ावासियों को स्वयं अगुवाई करनी होगी.

“ग़ाज़ा युद्धविराम योजना को लागू करने का दूसरा चरण बहुत अहम है. इसके लिए हमारे संकल्प और सामूहिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी.”

रमीज़ अलकबरोव ने कहा कि मौजूदा क्षण, फ़लस्तीनियों और इसराइलियों के लिए एक अधिक स्थिर व सुरक्षित भविष्य की नींव को तैयार करने का एक वास्तविक अवसर है.

विशाल आवश्यकताएँ

युद्धविराम लागू हुए कई महीने बीतने के बावजूद अब भी वहाँ विशाल मानवीय सहायता आवश्यकताएँ हैं और लगभग पूरी आबादी मानवीय राहत पर निर्भर है. 

“मैंने एक छोटी बच्ची को भारी पत्थर उठाते हुए देखा जो वो इसलिए अपने आश्रय स्थल तक ले जा रही थी, ताकि उसे हवा में उड़ने से रोक सके.”

उधर, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में, इसराइली सैन्य बलों के अभियान के बीच नकारात्मक रुझानों को हवा मिल रही है और हालात निरन्तर बिगड़ रहे हैं. इसराइली बस्तियों का विस्तार किया जा रहा है, उनमें रहने वाले निवासी हिंसा कर रहे हैं, फ़लस्तीनियों सम्पत्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है और बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया गया है.

विशेष उप समन्वयक ने आगाह किया कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी (UNRWA) पर दबाव डालने के लिए तेज़ी से एक मुहिम छेड़ी गई है. 

Source : UN News

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