मार्च 2026 में ग़ाज़ा की नाकाबंदी तोड़ने के लिए इतिहास की सबसे बड़ी वैश्विक मानवीय पहल

ग्लोबल सुमूद फ़्लोटिला ने गुरुवार को घोषणा की, कि मार्च 2026 में ग़ाज़ा की नाकाबंदी तोड़ने के लिए ज़मीन और समुद्र दोनों रास्तों से एक विशाल मानवीय अभियान शुरू किया जाएगा। संगठन ने इसे “इतिहास में सबसे बड़ा मानवीय सहायता अभियान” बताया है। इस पहल में 100 से अधिक देशों से हज़ारों कार्यकर्ता शामिल होंगे।

यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब 10 अक्टूबर से लागू संघर्षविराम समझौते के बावजूद, इज़राइल पर ग़ाज़ा में मानवीय प्रावधानों का पालन न करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इनमें ईंधन, राहत सामग्री और मलबा हटाने के लिए ज़रूरी उपकरणों को ग़ाज़ा में प्रवेश न देने की बात शामिल है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने बयान में ग्लोबल सुमूद फ़्लोटिला ने “फ़िलिस्तीन के लिए इतिहास के सबसे बड़े समन्वित मानवीय राहत अभियान” की औपचारिक शुरुआत का ऐलान किया।

इस अभियान के तहत एक समुद्री फ़्लोटिला और एक समन्वित ज़मीनी काफ़िला शामिल होगा, जो 29 मार्च 2026 को रवाना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य ग़ाज़ा की नाकाबंदी को तोड़ना और वहाँ के मानवीय संकट को कम करना बताया गया है।

संगठन के अनुसार, यह पूरी तरह शांतिपूर्ण और संगठित पहल होगी, जिसमें दुनिया भर के कार्यकर्ता ग़ाज़ा में हो रहे कथित जनसंहार, नाकाबंदी, भुखमरी और नागरिक जीवन के विनाश के ख़िलाफ़ एकजुट होकर आवाज़ उठाएंगे।

ग्लोबल सुमूद फ़्लोटिला ने साफ़ कहा कि यह अभियान पहले हुए सभी प्रयासों से कहीं बड़ा है और ग़ाज़ा की नाकाबंदी समाप्त करने के लिए एक वैश्विक स्तर के जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

इस मानवीय मिशन में 1,000 से अधिक डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी भाग लेंगे। इनके साथ शिक्षक, इंजीनियर, पुनर्निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ और युद्ध अपराधों व पर्यावरणीय विनाश की जाँच करने वाली टीमें भी शामिल होंगी। संगठन ने इसे फ़िलिस्तीनी जनता के समर्थन में एक समग्र अंतरराष्ट्रीय प्रयास बताया है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, इज़राइल ने 7 अक्टूबर 2023 से ग़ाज़ा की आबादी के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ रखा है, जिसे जनसंहार बताया गया है। इस दौरान व्यापक हत्याएँ, भुखमरी, तबाही, विस्थापन और सामूहिक गिरफ़्तारियाँ हुईं। आरोप है कि यह सब अमेरिका और यूरोपीय देशों के समर्थन से किया गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय अपीलों और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेशों को नज़रअंदाज़ किया गया।

हालाँकि 10 अक्टूबर 2025 को संघर्षविराम समझौता हुआ था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इज़राइल इसके प्रावधानों का रोज़ाना उल्लंघन कर रहा है।

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