सोशल मीडिया पर इन दिनों भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत के नाम से एक बयान तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वायरल दावे में कहा जा रहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी दी है कि अगर वे बिना सोचे-समझे कानून लागू करेंगे, तो उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाया जा सकता है।
क्या है वायरल दावा?
फेसबुक पर ‘ANCIENT’ नाम के एक यूजर द्वारा शेयर किए गए एक इन्फोग्राफिक में लिखा है:
की, “cji सूर्यकान्त का बड़ा बयान माननीय प्रधानमंत्री आप ऐसे बिना सोचे समझे कोई भी कानून लागू नहीं कर सकते अन्यथा भारतीय कानून के अनुसार आपको प्रधानमंत्री के पद से हटाया जा सकता है”
इस इन्फोग्राफिक को अब तक 38 हजार से अधिक लाइक्स, 5 हजार से ज्यादा कमेंट्स और 4 हजार से अधिक शेयर मिल चुके हैं, जिससे यह दावा काफी तेजी से फैल गया।
फैक्ट चेक:
Times Headline की फैक्ट-चेक टीम ने सबसे पहले वायरल इन्फोग्राफिक में इस्तेमाल की गई तस्वीर की जांच की। जांच में सामने आया कि इन्फोग्राफिक में जिस तस्वीर का उपयोग किया गया है, वह CJI जस्टिस सूर्यकांत की नहीं बल्कि पूर्व CJI बी.आर. गवई की है, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया गया है।
इसके बाद हमारी टीम ने जस्टिस सूर्यकांत, पूर्व CJI बी.आर. गवई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी हालिया खबरों की पड़ताल की। लेकिन किसी भी भरोसेमंद स्रोत या समाचार रिपोर्ट में ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया।
हमारी टीम ने जांच को आगे बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध प्रेस रिलीज़ भी खंगाली लेकिन, वहां भी न तो CJI जस्टिस सूर्यकांत और न ही पूर्व CJI बी.आर. गवई की ओर से ऐसा कोई बयान जारी किया गया है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित आधिकारिक प्रेस रिलीज़ और घोषणाओं की भी समीक्षा की गई, लेकिन वहां भी इस तरह की किसी चेतावनी या टिप्पणी का कोई ज़िक्र नहीं मिला।
Times Headline ने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स के जरिए सर्च किया, लेकिन किसी भी मुख्यधारा की मीडिया संस्थान द्वारा प्रकाशित ऐसी कोई खबर नहीं मिली। यदि देश के मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री को पद से हटाने जैसी गंभीर चेतावनी दी होती, तो इसकी व्यापक मीडिया कवरेज ज़रूर होती।
निष्कर्ष
Times Headline के फैक्ट-चेक में यह साफ हो गया है कि वायरल इन्फोग्राफिक में किया गया दावा पूरी तरह फर्जी है। CJI जस्टिस सूर्यकांत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिना सोचे-समझे कानून लागू करने पर पद से हटाने की चेतावनी देने की बात भ्रामक और असत्य है।
यह पोस्ट गलत तस्वीर, मनगढ़ंत बयान और भ्रामक जानकारी के ज़रिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश है।





