संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने, फ़लस्तीनी क्षेत्रों में हालात को “मानवजनित आपदा” क़रार दिया है और कहा है कि यह संकट इसराइल द्वारा मानवाधिकारों की अनदेखी और हमास समेत अन्य फ़लस्तीनी सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघनों के मिश्रित प्रभाव का परिणाम है.
उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने गुरूवार को मानवाधिकार परिषद में कहा कि इसराइल ने “आवासीय इमारतों और अस्थाई तम्बुओं पर लगातार हमले जारी रखे, जिससे आसपास के पूरे क्षेत्र तबाह हो गए.”
इस रिपोर्ट में 31 अक्टूबर 2025 तक के 12 महीनों की अवधि की घटनाओं को शामिल किया गया है.
मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि इसराइली हमलों के कारण “बड़े पैमाने पर आम नागरिकों की मौत” हुई हैं.
केवल एक वर्ष की अवधि में 25 हज़ार 500 से अधिक फ़लस्तीनी लोगों की मौत हुई और 68 हज़ार 800 से अधिक लोग घायल हुए.
वोल्कर टर्क ने बताया कि मई के अन्त से लेकर अक्टूबर की शुरुआत के बीच, गै़र-यूएन संचालित खाद्य वितरण केन्द्रों के पास, इसराइली बल की कार्रवाई में कुल 2,435 फ़लस्तीनी मारे गए, जिनमें अधिकतर युवा पुरुष और लड़के थे.
उन्होंने कहा कि पश्चिमी तट में, इसराइली सुरक्षा बलों ने हवाई हमले जारी रखे और अवैध बल का प्रयोग किया, जिसके कारण सैकड़ों फ़लस्तीनी लोगों की मौत हुई.
एक बड़ा संकट…
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, ग़ाज़ा में अक्टूबर 2025 में हुए नाज़ुक युद्धविराम के बाद से अब तक, 600 से अधिक फ़लस्तीनी लोगों की मौत हो चुकी है और 1,600 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
इस स्थिति पर मानवाधिकार प्रमुख ने कहा, “दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से में, यह एक बड़ा संकट माना जाता…”
इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ फ़्रांसेस्का अल्बानीज़ ने, ग़ाज़ा में मौजूदा हालात को “विनाशकारी” क़रार दिया है.
विशेष रैपोर्टेयर के रूप में उन्होंने कहा कि युद्धविराम के बावजूद, परिवार पानी से भरे तम्बुओं में किसी तरह जीवन गुज़ार रहे हैं, और अब भी गोलीबारी, भूख और रोकी जा सकने वाली बीमारियों की वजह से, लोगों की मौतें हो रही हैं.
व्यक्तिगत प्रतिशोध की निन्दा
अफ़ग़ानिस्तान पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर रिचर्ड बैनेट ने, जिनीवा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए, फ़्रांसेस्का अल्बानीज़ से इस्तीफ़ा माँगे जाने की अपीलों को खारिज कर दिया.
उन्होंने, उन स्वतंत्र विशेषज्ञों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे “व्यक्तिगत प्रतिशोध” के अभियानों की भी निन्दा की, जो इसराइल को लेकर अल्बानीज़ की टिप्पणियों को ग़लत ढंग से पेश करने वाले एक ऑनलाइन वीडियो के सामने आने के बाद तेज़ हुए हैं.
उन्होंने बताया कि अल्बानीज़ पर जुलाई 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने कथित रूप से राष्ट्रीय सम्प्रभुता के “गम्भीर उल्लंघन” के आरोप में प्रतिबन्ध लगाए थे.
साथ ही, फ़रवरी 2025 के बाद से अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय से जुड़े न्यायाधीशों और अभियोजकों पर भी इसी तरह के प्रतिबन्ध लगाए गए थे.
विशेष रैपोर्टेयर रिचर्ड बैनेट ने कहा कि विशेष प्रक्रिया के तहत काम करने वाले विशेषज्ञों की रिपोर्टों और बयानों में जिन देशों का उल्लेख होता है, वे उनसे कड़ी असहमति जता सकते हैं और ऐसा करना उनका अधिकार है.
हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों के बयानों या विचारों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश करना और उन पर व्यक्तिगत हमले करना स्वीकार्य नहीं है.
बैनेट ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबन्ध, मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वालों और अपराधियों के लिए होते हैं, न कि मानवाधिकारों की रक्षा करने वालों के लिए.
मानवाधिकार विशेषज्ञ
यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञ और विशेष रैपोर्टेयर, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं, वो किसी देश या सरकार से स्वतंत्र होते हैं और अपनी व्यक्तिगत हैसियत में काम करते हैं.
उन्हें जिनीवा स्थित यूएन मानवाधिकार परिषद, किसी देश या विशेष मानवाधिकार स्थिति की जाँच पड़ताल करके, रिपोर्ट सौंपने के लिए नियुक्त करती है.
विशेष रैपोर्टेयर और स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों को अपना काम करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से कोई वेतन इत्यादि नहीं मिलता है.
Source : UN News Hindi
