गाज़ा पट्टी की लंबे समय से जारी नाकाबंदी को तोड़ने के उद्देश्य से फ़िलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय नागरिक समाज संगठनों ने एक बड़े समुद्री अभियान की घोषणा की है। “फ़्रीडम फ़्लोटिला” और “सुमुद कॉन्वॉय” के संयुक्त तत्वावधान में यह काफ़िला 12 अप्रैल को भूमध्यसागर के विभिन्न बंदरगाहों से गाज़ा के लिए रवाना होगा। इस अभियान में 200 जहाज़ शामिल किए जाने की योजना है, जो इसे अब तक के सबसे बड़े समुद्री प्रयासों में से एक बनाता है।
इस पहल का नेतृत्व कर रहे तुर्की के IHH ह्यूमैनिटेरियन रिलीफ़ फ़ाउंडेशन के प्रमुख बुलेंट यिलदिरिम ने बताया कि इस अभियान के लिए दुनिया भर से सहयोग जुटाया जा रहा है। यूरोप, एशिया, अफ्रीका, तुर्किये और खाड़ी देशों सहित कई क्षेत्रों से धन एकत्र कर जहाज़ों की खरीद की जाएगी। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर जहाज़ों का एक साथ रवाना होना इस काफ़िले को रोकना कठिन बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में समुद्री मार्ग ही सहायता पहुंचाने का एकमात्र विकल्प बचा है।
यह काफ़िला स्पेन, इटली और ट्यूनीशिया के भूमध्यसागरीय बंदरगाहों से रवाना होगा और इसमें 150 देशों के हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस अभियान को लगभग 200 नागरिक समाज संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें मावी मरमारा फ़्रीडम एंड सॉलिडेरिटी एसोसिएशन, IHH और फ़िलिस्तीन सपोर्ट प्लेटफ़ॉर्म जैसे संगठन शामिल हैं।
इस मिशन का उद्देश्य केवल राहत सामग्री पहुंचाना नहीं है, बल्कि गाज़ा में मानवीय और पेशेवर सहायता भी उपलब्ध कराना है। काफ़िले में 1,000 से अधिक डॉक्टर, नर्स और चिकित्सा कर्मियों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा शिक्षक, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण से जुड़े इंजीनियर, वकील और युद्ध अपराध जांचकर्ता भी इस अभियान का हिस्सा होंगे। इससे संकेत मिलता है कि यह पहल गाज़ा में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति को मजबूत करने के व्यापक उद्देश्य से की जा रही है।
इस अभियान की पृष्ठभूमि में गाज़ा की गंभीर मानवीय स्थिति को मुख्य कारण बताया जा रहा है। बुलेंट यिलदिरिम के अनुसार, सहायता पहुंचाने में बाधाएं डाली जा रही हैं और लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे भूख और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस स्थिति को लेकर सतर्क रहने की अपील की।
इस तरह के समुद्री प्रयास पहले भी किए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें रोक दिया गया था। पिछले वर्ष अक्टूबर में “ग्लोबल रेज़िलिएंस फ़्लोटिला” के 41 जहाज़ों को, जिनमें लगभग 400 लोग सवार थे, गाज़ा की ओर बढ़ते समय इज़रायली बलों ने रोक लिया था। फ़्लोटिला के अनुसार, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में घेर लिया गया और उन्होंने इसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन बताया था। इस घटना के बाद कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी चिंता व्यक्त की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की मांग की, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने इस कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया।
फ़्रीडम फ़्लोटिला का इतिहास भी विवादों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2010 में “मावी मरमारा” जहाज़ को रोकने के दौरान कई तुर्की कार्यकर्ताओं और नागरिकों की मौत हो गई थी, जिससे तुर्किये और इज़रायल के बीच बड़ा राजनयिक संकट पैदा हो गया था। बाद में इस विवाद का समाधान इज़रायल द्वारा माफ़ी और पीड़ितों के परिवारों को मुआवज़ा देने के बाद हुआ।
करीब 24 लाख लोगों की आबादी वाले गाज़ा में पिछले 18 वर्षों से नाकाबंदी लागू है। ऐसे में प्रस्तावित 200 जहाज़ों का यह काफ़िला न केवल मानवीय सहायता पहुंचाने का प्रयास है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाज़ा की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करने की एक बड़ी पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।
