राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में Revolutionary Workers’ Party of India यानी (आरडब्ल्यूपीआई) ने ईरान पर अमेरिका–इज़राइल के कथित हमलों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी ने इन हमलों को “बिना उकसावे की गई आक्रामक कार्रवाई” बताते हुए कहा कि इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और तनाव की स्थिति गंभीर हो गई है।
प्रदर्शन में नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों में सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान गई है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की हत्या ने वैश्विक स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है और दुनिया के कई हिस्सों में लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं।
इस विरोध-प्रदर्शन में Indian People in Solidarity with Palestine यानी (आईपीएसपी), Disha Students’ Organization और Naujawan Bharat Sabha सहित कई प्रगतिशील संगठनों ने भी भागीदारी की और एकजुटता जताई।
सभा को संबोधित करते हुए प्रोफेसर Nandita Narain ने कहा कि साम्राज्यवादी नीतियां अब पूरी तरह उजागर हो चुकी हैं। उन्होंने ईरान की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए भारत में बहिष्कार, विनिवेश और प्रतिबंध (बीडीएस) आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आरडब्ल्यूपीआई की प्रतिनिधि शिवानी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिकी नीतियां अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और देशों की संप्रभुता की अनदेखी करती रही हैं। उनके अनुसार हालिया हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
इसके अलावा आईपीएसपी के प्रतिनिधि विशाल ने कहा कि फिलिस्तीन में अमेरिका–इज़राइल की भूमिका को व्यापक क्षेत्रीय संकट से अलग नहीं देखा जा सकता। उन्होंने Gaza Strip में बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों और बुनियादी ढांचे के विनाश का उल्लेख करते हुए इसे इसी संघर्ष की कड़ी बताया।
‘बिगुल मजदूर दस्ते’ के सनी ने कहा कि इस युद्ध का असर सिर्फ़ युद्ध वाले देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। उनका मतलब था कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीज़ल और दूसरी जरूरी चीज़ों की कीमतें बढ़ सकती हैं और आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
प्रदर्शन के दौरान जन्तर-मन्तर पर प्रगतिशील कलाकारों ने क्रांतिकारी गीतों और कला-प्रस्तुतियों के माध्यम से एकजुटता का संदेश दिया। सभा का समापन ईरान की जनता के समर्थन में नारेबाजी और संघर्ष जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ।
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