जेल में बंद किसी बीमार या घायल कैदी के लिए समय पर इलाज उसकी जिंदगी बचाने के लिए बेहद जरूरी होता है। लेकिन फिलिस्तीनी प्रिजनर सोसाइटी (PPS) ने आरोप लगाया है कि इजरायली जेलों में फिलिस्तीनी कैदियों को जरूरी चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। संगठन के मुताबिक, इलाज में देरी और मेडिकल लापरवाही के कारण कई बीमार और घायल कैदियों की हालत लगातार बिगड़ रही है और उनकी जिंदगी खतरे में पड़ रही है।
PPS ने 15 वर्षीय फिलिस्तीनी किशोर मोहम्मद मूसा सुलेमान हमीद का मामला सामने रखा है। बेथलहम के दक्षिण-पूर्व में स्थित तुकू कस्बे के रहने वाले हमीद को फरवरी 2026 से हिरासत में रखा गया है। संगठन के मुताबिक, हिरासत के दौरान उसकी तबीयत काफी बिगड़ गई। इसके बाद उसे ओफर जेल से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी ओपन-हार्ट सर्जरी की गई।
PPS का कहना है कि हमीद के परिवार को न तो उससे मिलने दिया गया और न ही उसकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। परिवार को उसकी सर्जरी के बारे में इजरायली जेल अधिकारियों से नहीं, बल्कि एक मानवाधिकार संगठन के जरिए पता चला। संगठन के मुताबिक, हमीद की हालत अब भी गंभीर है और उसे गहन चिकित्सा देखभाल की जरूरत है।
इसी कस्बे के 30 वर्षीय कैदी मलिक हानी जिब्रिल का मामला भी PPS ने उठाया है। संगठन के मुताबिक, इसी महीने की शुरुआत में चेकपॉइंट 300 के पास इजरायली बलों की गोली लगने से जिब्रिल घायल हो गया था और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया। बाद में उसकी सर्जरी हुई, जिसके दौरान उसका दायां पैर काटना पड़ा। PPS ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज नहीं मिलने और हिरासत में रखे जाने के कारण उसकी हालत बिगड़ती गई।
PPS का यह भी कहना है कि ये दोनों मामले अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद फिलिस्तीनी कैदियों के बीच मेडिकल लापरवाही के बढ़ते मामलों का हिस्सा हैं। संगठन ने खास तौर पर अंग काटे जाने के मामलों पर चिंता जताई है। PPS के मुताबिक, गाजा से जुड़े कई घायल कैदी गिरफ्तारी से पहले गोली लगने के कारण अपने अंग गंवा चुके हैं, जबकि सैकड़ों घायल कैदी अब भी हिरासत में हैं और उन्हें लगातार इलाज तथा जरूरी सहायक उपकरणों की जरूरत है।
संगठन ने आरोप लगाया कि मेडिकल लापरवाही, भोजन की कमी और इलाज से इनकार कैदियों के खिलाफ अतिरिक्त दबाव के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। कैदियों की मेडिकल स्थिति की निगरानी और उनके मेडिकल रिकॉर्ड हासिल करना भी मुश्किल है। संगठन का कहना है कि कई कैदी आगे दुर्व्यवहार या बदले की कार्रवाई के डर से इलाज मांगने से बचते हैं।
PPS ने संयुक्त राष्ट्र, इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की अपील की है। संगठन ने बीमार और घायल कैदियों को पर्याप्त इलाज देने, कथित मेडिकल लापरवाही की नीति खत्म करने और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
PPS के अनुसार, इजरायली अधिकारी इस समय 23 से अधिक जेलों, हिरासत केंद्रों और पूछताछ सुविधाओं में करीब 9,400 फिलिस्तीनी कैदियों को रखे हुए हैं। इनमें 95 महिलाएं और लगभग 380 बच्चे भी शामिल हैं।
