असम के गुवाहाटी की जैस्मिन सुल्ताना की कहानी मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों की एक शानदार मिसाल है। उन्होंने 2025 में असम लोक सेवा आयोग (APSC) की संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास करके असम पुलिस सेवा (APS) में छठा स्थान हासिल किया। यह सफलता उन्हें कई सालों की लगातार मेहनत और संघर्ष के बाद मिली।
जैस्मिन की पढ़ाई असमिया माध्यम से हुई। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गुवाहाटी में पूरी की और बाद में कॉटन यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स किया। सिविल सेवा में जाने का सपना उन्हें कक्षा 8 में ही आया था, जब उन्हें पता चला कि एक सिविल सेवक समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
उनकी राह आसान नहीं थी। असमिया भाषा में पढ़ाई की सामग्री कम होने के कारण उन्हें अंग्रेज़ी किताबों से पढ़कर खुद नोट्स बनाकर असमिया में तैयार करने पड़ते थे। इसके लिए उन्हें ज्यादा मेहनत करनी पड़ी, लेकिन इससे उनकी समझ और भी मजबूत हुई।
उन्होंने कई बार परीक्षा दी, लेकिन शुरुआती कोशिशों में सफलता नहीं मिली। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार छठे प्रयास में सफल हुईं। इस दौरान उन्हें सामाजिक दबावों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया।
अपनी तैयारी के दौरान जैस्मिन ने काम भी किया और पढ़ाई भी जारी रखी। साथ ही, उन्होंने कुरान और भगवद गीता का अध्ययन किया, जिससे उन्हें मानसिक शांति और ध्यान बनाए रखने में मदद मिली।
आज जैस्मिन की कहानी उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, खासकर जो क्षेत्रीय भाषा से पढ़ाई करते हैं। उनका मानना है कि सफलता ज्यादा घंटों पढ़ने से नहीं, बल्कि सही तरीके और ईमानदारी से पढ़ने से मिलती है।
