‘आस्था’ की आड़ में साज़िश? 18 करोड़ का फ़ार्महाउस और यौन शोषण के आरोपों में घिरे अशोक खरात की कहानी

नासिक के एक छोटे से गाँव मिरगाँव में आज खामोशी है… लेकिन इस खामोशी के पीछे छुपी है डर, शक और एक ऐसा मामला जिसने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया है। इस कहानी के केंद्र में हैं अशोक खरात—एक ऐसा नाम, जो कभी ‘धार्मिक गुरु’ के तौर पर जाना जाता था, लेकिन अब महिलाओं के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में पुलिस हिरासत में है।

‘गुरु’ से आरोपी तक

करीब 15 साल पहले मिरगाँव आए खरात ने ‘शिवनिका संस्थान’ की स्थापना की। भव्य मंदिर बनवाया, धार्मिक आयोजन शुरू किए और धीरे-धीरे लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर ली। लोग बताते हैं, वह भविष्य बताने, समस्याएं दूर करने और तंत्र-मंत्र के जरिए समाधान देने का दावा करता था। यही विश्वास धीरे-धीरे उसकी ताकत बन गया।

आरोपों का जाल

अब सामने आ रही शिकायतें इस ‘विश्वास’ की भयावह सच्चाई दिखाती हैं। महिलाओं का आरोप है कि:

  • शादी और वैवाहिक समस्याओं के समाधान के नाम पर बुलाया जाता था
  • धार्मिक विधियों के बहाने बार-बार शोषण किया गया
  • डराया जाता था कि सच बताने पर परिवार को नुकसान होगा

एक पीड़िता के मुताबिक— “अगर मैंने किसी को बताया, तो मेरे पति की जान चली जाएगी”—ऐसी धमकियां दी गईं

जांच में चौंकाने वाले खुलासे

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, पुलिस जांच में 8 महिलाओं से जुड़े 35 वीडियो मिले हैं जिनमें कथित तौर पर तंत्र-मंत्र के नाम पर शोषण दिखाया गया है, खरात के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं और जांच एसआईटी कर रही है।

वैभव और विवाद

आरोपों के बीच उसकी संपत्ति भी सवालों में है:

  • 16 एकड़ में फैला करीब 18 करोड़ का फ़ार्महाउस
  • कुल संपत्ति 40 करोड़ रुपये से ज़्यादा
  • गाँव में दर्जनों एकड़ ज़मीन खरीदने के आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के किनारे अतिक्रमण कर रास्ते तक बंद कर दिए गए।

सत्ता से रिश्तों पर सवाल

मामला तब और गरमा गया जब उसकी तस्वीरें कई प्रभावशाली लोगों के साथ सामने आईं। इस विवाद के बाद रूपाली चाकणकर ने राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया। सवाल उठ रहा है—क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला है या उसके पीछे कोई बड़ा संरक्षण तंत्र भी था?

गाँव में डर, न्याय की उम्मीद

मिरगाँव के लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं। डर साफ है— “अगर वह बाहर आया, तो हमें परेशान करेगा

लेकिन साथ ही एक मांग भी तेज़ हो रही है— दोषी को कड़ी सज़ा मिले, ताकि आस्था के नाम पर किसी और के साथ ऐसा न हो।

आख़िरी सवाल:

क्या यह मामला सिर्फ अंधविश्वास का है… या फिर सत्ता, पैसा और डर के उस गठजोड़ का, जो सच को दबा देता है?

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