संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि ग़ाज़ा में अक्टूबर 2025 में युद्धविराम की घोषणा के छह महीने बाद भी, इसराइली हमले जारी रहने के कारण, पूरे क्षेत्र में फ़लस्तीनी लोग असुरक्षित हैं, और वो चाहे कुछ करें या नहीं करें और किसी भी स्थान पर हों, उनके लिए कोई सुरक्षा नहीं है.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय – OHCHR ने फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया है कि अप्रैल महीना आरम्भ होने से अब तक, इसराइली सेना के हमलों में कम से कम 32 फ़लस्तीनी लोग मारे जा चुके हैं.
ग़ाज़ा में रोज़ाना इसराइल के हवाई हमले, गोलीबारी और गोलाबारी जारी है, जिससे 10 अक्टूबर 2025 को युद्धविराम लागू होने के बाद से, मारे गए फ़लस्तीनियों की संख्या 738 हो गई है.
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को कहा है, “हत्याओं का यह निरन्तर सिलसिला, फ़लस्तीनी जीवन के प्रति निरन्तर उपेक्षा को दर्शाता है, जिसे व्यापक दंडमुक्ति (impunity) के माहौल से बढ़ावा मिला है.”
उन्होंने कहा है, “पिछले 10 दिनों से, फ़लस्तीनी लोग अब भी अपने बचे-खुचे घरों, आश्रयों, विस्थापित परिवारों के टैंटों, सड़कों पर, वाहनों में, चिकित्सा केन्द्रों और कक्षाओं में मारे जा रहे हैं और घायल हो रहे हैं.”
सभी जन हैं निशाना
हताहतों में महिलाएँ, बच्चे, विकलांग व्यक्ति, एक मानवीय सहायता ठेकेदार और एक पत्रकार शामिल हैं.
- 9 अप्रैल कोउत्तरी ग़ाज़ा के बेत लाहिया में, तीसरी कक्षा की छात्रा रिताज रिहान की मौत तब हो गई जब इसराइली सैन्य बलों ने, उस भीड़भाड़ वाले तम्बू शिविर पर गोलीबारी की, जहाँ उसकी अस्थाई कक्षा चल रही थी.
- 8 अप्रैल को इसराइली सेना ने ग़ाज़ा शहर में अल जज़ीरा के पत्रकार मोहम्मद वशाह को निशाना बनाने और मारने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया. बाद में एक बयान जारी करके दावा किया गया कि वह हमास का कार्यकर्ता था. इसराइल ने ग़ाज़ा में अनेक पत्रकारों की ऐसी हत्याओं में यही आधार पेश किया है, जिसका समर्थन करने के लिए कोई ऐसे ठोस सबूत नहीं दिए गए जीनकी स्वतंत्र रूप जाँच की जा सके.
- यूएन मानवाधिकार कार्यालय द्वारा सत्यापित आँकड़ों के अनुसार, इसराइली सेना के हाथों मारे गए मोहम्मद वशाह, 7 अक्टूबर 2023 से 294वें फ़लस्तीनी पत्रकार हैं.
- इस बीच, इसराइल ने, अन्तरराष्ट्रीय पत्रकारों की ग़ाज़ा तक स्वतंत्र पहुँच पर पूर्ण प्रतिबन्ध जारी रखा हुआ है.
- 6 अप्रैल को इसराइली सेना ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कार्यकर्ताओं को ले जा रही एक कार पर गोलीबारी की, जिसमें चालक की मौत हो गई. ग़ाज़ा में 7 अक्टूबर 2023 से अप्रैल (2026) की शुरुआत तक, 589 सहायता कर्मी मारे जा चुके हैं, जिनमें 397 यूएन कर्मचारी और सहयोगी टीमों के सदस्य शामिल हैं.
युद्ध अपराध
वोल्कर टर्क ने कहा है कि ग़ाज़ा में मारे गए पत्रकारों और मानवीय कर्मियों की संख्या अभूतपूर्व है. यह स्थिति नागरिक नुक़सान को और बढ़ा देती है क्योंकि इससे स्थिति की रिपोर्टिंग करना और मानवीय सहायता पहुँचाना जानलेवा बन गया है.
“अब आवाजाही ख़ुद एक जानलेवा गतिविधि बन गई है. पैदल चलते, गाड़ी चलाते या बाहर खड़े होने की स्थितियों में फ़लस्तीनियों के, इसराइली सेना द्वारा मारे जाने की घटनाएँ लगभग हर दिन दर्ज की जा रही हैं.”
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने स्पष्ट किया, “युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होने वाले नागरिकों को निशाना बनाना एक युद्ध अपराध है…”
फ़लस्तीनी लोगों की पीड़ा इस कारण और भी गम्भीर है क्योंकि इसराइल ने, अत्यन्त आवश्यक मानवीय सहायता के प्रवेश और आपूर्ति पर लगातार प्रतिबन्ध लगाए हुए हैं.

इसके साथ ही नागरिक बुनियादी ढाँचे का विनाश, क़ानून लागू करने वाली संरचनाओं को निशाना बनाना और फ़लस्तीनी सशस्त्र समूहों द्वारा बढ़ती हिंसा ने स्थिति को बदतर बना दिया है.
मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, इन सशस्त्र फ़लस्तीनी समूहों को, कथित तौर पर इसराइली सेना का समर्थन प्राप्त है.
वोल्कर टर्क ने पिछले छह महीनों के दौरान, 700 से अधिक फ़लस्तीनियों की मौत और 2,000 से अधिक के घायल होने का सन्दर्भ देते हुए कहा, “फ़लस्तीनियों के पास जीवित रहने का कोई नुस्ख़ा नहीं है: वे जो कुछ भी करें या नहीं करें, जहाँ भी जाएँ या नहीं जाएँ, उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है. इस स्थिति को युद्धविराम कहना बहुत कठिन है.”
यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने कहा, “अन्तरराष्ट्रीय कानून के तहत ढाई साल तक चले अपराधों और हज़ारों फ़लस्तीनी नागरिकों की मौत के बाद, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को अब केवल शब्दों से आगे बढ़ना होगा.”
उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को इसराइल द्वारा अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के निरन्तर उल्लंघन को रोकने, सभी पक्षों द्वारा किए गए अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने और यह गारंटी देने के लिए सार्थक क़दम उठाने होंगे कि फ़लस्तीनी लोग अपने घरों की मरम्मत और समुदायों पुनर्गठन का कार्य शुरू कर सकें.”
Source : UN News
