ट्रंप-ईरान डील को लेकर ‘इज़राइल’ की बढ़ी चिंता, CNN रिपोर्ट में कई बड़े दावे

ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर पश्चिम एशिया की राजनीति एक बार फिर गर्माती दिखाई दे रही है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, CNN ने दावा किया है कि इज़राइली अधिकारियों को डर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ ऐसा समझौता कर सकते हैं, जो इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह संबोधित नहीं करेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइल को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि किसी संभावित समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों के मुद्दे को शामिल नहीं किया जा सकता। इज़राइली अधिकारियों का मानना है कि यदि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त किए बिना कोई डील होती है, तो वह “अधूरी” मानी जाएगी।

CNN के हवाले से एक इज़राइली अधिकारी ने कहा कि तेल अवीव को आशंका है कि ट्रंप लंबी बातचीत से थककर “किसी भी तरह का समझौता” करने के लिए तैयार हो सकते हैं, भले ही उसमें आखिरी समय में बड़ी रियायतें क्यों न देनी पड़ें।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर समन्वय जारी है। इसमें ईरान की ऊर्जा सुविधाओं और अहम बुनियादी ढांचे पर हमले, साथ ही वरिष्ठ ईरानी नेताओं को निशाना बनाने जैसी योजनाओं पर भी चर्चा शामिल बताई गई है, अगर कूटनीतिक प्रयास विफल हो जाते हैं।

एक अन्य इज़राइली अधिकारी ने CNN से कहा, “वास्तविक चिंता यह है कि ट्रंप एक खराब समझौते पर पहुंच सकते हैं। इज़राइल इसे जितना संभव हो प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।” हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस मामले में सावधानी बरत रहे हैं, क्योंकि वह नहीं चाहते कि उन पर ट्रंप को दोबारा युद्ध की ओर धकेलने का आरोप लगे।

इसी बीच, फर्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने से पहले कुछ अहम शर्तें रखी हैं। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि तेहरान ने भरोसा बहाली के लिए पांच “न्यूनतम गारंटी” तय की हैं।

इन शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, खासतौर पर लेबनान में, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना और विदेशों में जमे ईरानी फंड्स को जारी करना शामिल है। इसके अलावा, ईरान युद्ध से हुए नुकसान के मुआवजे और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपने संप्रभु अधिकारों की मान्यता की भी मांग कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान को यह भी बताया कि युद्धविराम की घोषणा के बाद भी जारी समुद्री नाकाबंदी ने अमेरिका के प्रति उसके अविश्वास को और गहरा कर दिया है।

फर्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, तेहरान का कहना है कि इन शर्तों के व्यावहारिक तौर पर लागू होने और उनकी पुष्टि के बिना अमेरिका के साथ किसी नई बातचीत की संभावना नहीं है।

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