नाज़रेथ : कानूनी अधिकार संगठन अदालाह (Adalah) ने इज़राइली अधिकारियों से एक जर्मन पत्रकार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की तत्काल आपराधिक जांच शुरू करने की मांग की है। पत्रकार ने आरोप लगाया है कि इज़राइल की गिवोन जेल में हिरासत के दौरान उसे यौन उत्पीड़न, शारीरिक हिंसा और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा।
अदालाह ने रविवार को जारी अपने बयान में कहा कि उसने इस मामले को लेकर इज़राइल के अटॉर्नी जनरल, जेल सेवा के कानूनी सलाहकार, जेल कर्मचारियों की जांच करने वाली इकाई और गिवोन जेल प्रशासन के समक्ष औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। संगठन ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग की है।
संगठन के अनुसार यह मामला अक्टूबर का है, जब इज़राइली नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में “ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला” के जहाजों को रोक लिया था। गाजा पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने के उद्देश्य से यूरोप और अफ्रीका के विभिन्न बंदरगाहों से रवाना हुए इस अभियान में 500 से अधिक कार्यकर्ता शामिल थे।
अदालाह के मुताबिक, केवल “A.L.” नामाक्षरों से पहचानी गई जर्मन पत्रकार ने अपनी गवाही में बताया कि बंदरगाह से नेगेव स्थित केत्ज़ियोट जेल ले जाए जाने के दौरान उसे लंबे समय तक हथकड़ियों में रखा गया, आंखों पर पट्टी बांधी गई तथा मौखिक और शारीरिक दुर्व्यवहार के साथ धमकियों का भी सामना करना पड़ा।
पत्रकार की गवाही में यह भी दावा किया गया है कि गिवोन जेल में हिरासत के दौरान उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और वह यौन उत्पीड़न सहित अन्य गंभीर उल्लंघनों का शिकार बनी।
अदालाह ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद आवश्यक है। संगठन का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है।
दूसरी ओर, वकीलों और अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों की एक टीम ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) से भी अपील की है कि फिलिस्तीन से संबंधित अपनी जांच के दायरे को बढ़ाते हुए ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला के कार्यकर्ताओं द्वारा बताए गए कथित दुर्व्यवहारों को भी इसमें शामिल किया जाए।
