फैक्ट चेकः दिल्ली AIIMS के शवगृह में शवों के बैठने और चलने का दावा फर्जी, वायरल वीडियो AI से तैयार किया गया

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक कथित सीसीटीवी वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक शवगृह दिखाई देता है, जहां स्ट्रेचर पर सफेद चादरों से ढके कई शव रखे हुए हैं। कुछ ही क्षण बाद दो शव अचानक बैठ जाते हैं और फिर स्ट्रेचर अपने-आप आगे-पीछे खिसकते हुए नजर आते हैं। इस वीडियो को शेयर करने वाले कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि यह दिल्ली AIIMS के शवगृह का वास्तविक सीसीटीवी फुटेज है।

वायरल दावा

इस वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, ‘दिल्ली AIIMS के मुर्दाघर की फुटेज.. लोग इसे AI बता रहे हे तो कुछ लोग रियल घटना का हवाला दे रहे है.. में भी कनफ्यूज हु यह कैसे हो सकता है.. पलंग सफेद चादर और उसके बाद का करतब’

वहीं फेसबुक पर Haidar Pasha नामक यूजर ने इसे साझा करते हुए लिखा, ‘रूहें कांप जाएंगी! दिल्ली AIIMS के मुर्दाघर का यह खौफनाक मंजर देख उड़ जाएंगे होश! सोशल मीडिया पर दिल्ली AIIMS के नाम से वायरल हो रहे इस वीडियो ने सबको झकझोर कर रख दिया है। रात के सन्नाटे में मुर्दाघर के अंदर जो हुआ, वो कैमरे में कैद हो गया। यह वीडियो हमें चेतावनी देता है कि दुनिया में ऐसी बहुत सी शक्तियां हैं जिन्हें विज्ञान भी नहीं समझ पाया है। हमारी अपील: यह वीडियो सिर्फ डरने के लिए नहीं, बल्कि सीखने के लिए है। रात के अंधेरे में सुनसान जगहों पर अकेले निकलने से बचें। खासकर अपनी घर की बहू-बेटियों को अकेले बाहर न जाने दें। पता नहीं इस वीडियो में कितनी सच्चाई है दिल्ली AIIMS की बताई जा रही है’

इसी तरह एक अन्य फेसबुक यूजर ने भी वीडियो पोस्ट करते हुए उस पर लिखा, ‘दिल्ली एम्स के मूर्दाघर का खौफनाक सच! क्या सच में भूत होते हैं?’

फैक्ट चेक

Times Headline ने वायरल वीडियो की विस्तृत पड़ताल की। जांच में यह दावा पूरी तरह भ्रामक निकला। वीडियो दिल्ली AIIMS के शवगृह का वास्तविक सीसीटीवी फुटेज नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया वीडियो है।

सबसे पहले वीडियो का बारीकी से अवलोकन किया गया। जांच के दौरान कई ऐसे संकेत मिले जो AI-जनरेटेड वीडियो में आमतौर पर देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, बीच वाले शव की दिशा अचानक बदलती हुई दिखाई देती है, जबकि शरीर की गतिविधियों और उसकी छाया (Shadow) में भी स्पष्ट असंगतियां नजर आती हैं।

वीडियो के फ्रेम में “CAM 2 MORGUE ROOM” नाम से कैमरा पहचान दिखाई देती है, जिससे इसे सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जैसा दिखाने की कोशिश की गई है। हालांकि, वास्तविक सीसीटीवी फुटेज में सामान्यतः कैमरा आईडी के साथ तारीख और समय भी दर्ज होता है। वायरल वीडियो में टाइमस्टैम्प पूरी तरह गायब है, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

इसके बाद वीडियो को AI डिटेक्शन टूल्स Deepfake-o-meter और Detectvideo.ai से भी जांचा गया। दोनों प्लेटफॉर्म के विश्लेषण में वीडियो के AI-जनरेटेड होने के संकेत मिले। Deepfake-o-meter के AVSRDD (2025) मॉडल ने वीडियो के 99.9 प्रतिशत AI-जनित होने की संभावना जताई। वहीं Detectvideo.ai के विश्लेषण में Face Signals 52%, Motion Signals 91%, Texture Signals 68%, Source Signals 78% और Compression Signals 65% दर्ज किए गए, जो वीडियो के कृत्रिम रूप से तैयार किए जाने की ओर इशारा करते हैं।

दावे की पुष्टि के लिए गूगल पर “दिल्ली AIIMS शवगृह में लाशों के चलने का वीडियो वायरल” जैसे कीवर्ड्स से भी खोज की गई, लेकिन किसी भी विश्वसनीय समाचार संस्थान की रिपोर्ट में ऐसी घटना का कोई उल्लेख नहीं मिला। यदि देश के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक AIIMS में इस तरह की कोई घटना वास्तव में हुई होती, तो राष्ट्रीय मीडिया में इसकी व्यापक रिपोर्टिंग अवश्य होती।

वायरल वीडियो का तकनीकी विश्लेषण करने के लिए Times Headline ने AI विशेषज्ञ कुमार अनिकेत से भी संपर्क किया। फ्रेम-दर-फ्रेम जांच के बाद उन्होंने वीडियो में कई तकनीकी विसंगतियों की ओर संकेत किया।

उनके अनुसार वीडियो में शवों का उठना, बैठना और झुकना वास्तविक मानव गतिविधियों जैसा नहीं लगता। चादर का व्यवहार भी शरीर की वास्तविक बनावट के अनुरूप प्रतिक्रिया नहीं करता और उसकी गति अस्वाभाविक रूप से स्मूद दिखाई देती है।

विश्लेषण के दौरान यह भी पाया गया कि कई फ्रेमों में चादर और शरीर के किनारों पर हल्की विकृतियां दिखाई देती हैं। वस्तुओं का आकार सूक्ष्म रूप से बदलता रहता है तथा गति के दौरान उनकी सीमाएं स्थिर नहीं रहतीं। विशेषज्ञ के मुताबिक इस तरह की दृश्य खामियां AI से तैयार किए गए वीडियो में अक्सर देखने को मिलती हैं।

निष्कर्ष

Times Headline की जांच में स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया पर दिल्ली AIIMS के शवगृह का बताकर वायरल किया जा रहा वीडियो वास्तविक नहीं है। उपलब्ध तकनीकी विश्लेषण, AI डिटेक्शन टूल्स और विशेषज्ञों की राय से यह पुष्टि होती है कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है। इसलिए इसे दिल्ली AIIMS की वास्तविक घटना बताकर किया जा रहा दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत है।

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