भारत में संवैधानिक लोकतंत्र और जन-आंदोलनों की भूमिका: एक अंबेडकरवादी दृष्टिकोण

(एस.आर. दारापुरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट) 1. परिचय संवैधानिक लोकतंत्र केवल चुनावों, संसदीय संस्थाओं या सरकार बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें मौलिक…

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“रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन तक: डॉ. कलाम की कामयाबी और मुस्लिम नौजवानों के नाम एक पैग़ाम”

डॉ शुजाअत अली क़ादरी तारीख़ में कुछ शख़्सियतें ऐसी होती हैं, जिनकी ज़िंदगी सिर्फ़ उनकी अपनी कामयाबी की कहानी नहीं होती, बल्कि आने वाली नस्लों…

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