सफलता की कहानी: सहारनपुर के मोहम्मद दिलशाद—लकड़ी की कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला शिल्प गुरु

कभी छोटी-सी वर्कशॉप में दिन-रात छैनी और हथौड़े की आवाज़ों के बीच अपना सपना गढ़ने वाले सहारनपुर के कारीगर मोहम्मद दिलशाद आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गए हैं। वर्षों की मेहनत, लगन और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित ‘शिल्प गुरु पुरस्कार-2024’ तक पहुँचा दिया—यह पुरस्कार भारत की शिल्प परंपरा में उत्कृष्टता का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।

दिलशाद को यह पुरस्कार वुड कार्विंग यानी (शीशम की सेंटर टेबल) श्रेणी में उत्कृष्ट कारीगरी के लिए मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं उन्हें सम्मानित करते हुए भारतीय हस्तशिल्प परंपरा को आगे बढ़ाने में कलाकारों की भूमिका को सराहा। इस मंच पर खड़े होकर दिलशाद ने न सिर्फ अपनी मेहनत का सम्मान देखा, बल्कि सहारनपुर की मशहूर लकड़ी नक़्क़ाशी को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि लगन सच्ची हो और धैर्य साथ हो, तो छोटी-सी जगह से निकलकर भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। दिलशाद कहते हैं—“यह सम्मान मेरी कला का नहीं, पूरे सहारनपुर की परंपरा का है।”

आज उनका नाम उन कलाकारों में शामिल हो गया है, जिन्होंने भारतीय शिल्पकला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है, और उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक मिसाल बन चुकी है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *