ग़ाज़ा में हवाई हमले, गोलाबारी और बन्दूकों की गोलीबारी में फ़लस्तीनी लोग मारे जा रहे हैं और अपंग हो रह हैं. इस बीच यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली सेना देवार सीमेंट की बड़ी ईंटों बनाई गई पीली रेखा “Yello Line” को, नई सीमा रेखा समझे जाने के सुझावों को नकार दिया है.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए सहायता एजेंसी – UNRWA ने ग़ाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से कहा है कि अक्टूबर के अन्तिम दिनों में लागू हुए मौजूदा युद्धविराम के दौरान, 360 फ़लस्तीनी मारे गए हैं और 922 लोग घायल हुए हैं.
इनके अलावा, इसी अवधि के दौरान मलबे से, 617 शव भी निकाल गए हैं.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने भी कहा कि उनके कार्यालय ने मौजूदा युद्धविराम शुरू होने के बाद की अवधि में, 350 हमले दर्ज किए हैं. इन हमलों में मारे गए लोगों में, 7 महिलाएँ और 13 बच्चे हैं.
पीली रेखा के निकट हिंसा
वोल्कर टर्क ने कहा है कि सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव इस बारे में बहुत स्पष्ट है कि किसी चीज़ को नई सीमा रेखा या कुछ और नहीं कहा जाए, सम्पूर्ण ग़ाज़ा पट्टी क्षेत्र का सम्मान किया जाना होगा.
उन्होंने इस बारे में 17 नवम्बर को सुरक्षा परिषद द्वारा पारित किए गए प्रस्ताव का ज़िक्र किया जिसमें ग़ाज़ा में युद्ध के अन्त के लिए एक वृहद योजना प्रस्तुत की गई है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने बुधवार को जिनीवा में पत्रकारों से बातचीत में, ग़ाज़ा में सभी पक्षों से युद्धविराम का सम्मान किए जाने और इस प्रक्रिया में अगले चरण की तरफ़ बढ़त सुनिश्चित किए जाने का आहवान किया.
उन्होंने कहा, “ग़ाज़ा अब भी अकल्पनीय पीड़ाओं, हानि व भय का स्थान बना हुआ है. रक्तपात में कमी तो आई है, मगर यह पूरी तरह बन्द नहीं हुआ है.”
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए सहायता एजेंसी – UNRWA ने कहा है कि बीते सप्ताह के दौरान अधिकतर हिंसा, पीली रेखा के निकट होने की ख़बरें आई हैं, जहाँ इसकी बड़ी कंक्रीट ईंटों की जगह बदली गई है, जिससे नए सिरे से लोगों का विस्थापन हुआ है.
वोल्कर टर्क ने कहा, “इसराइल द्वारा हमले जारी हैं, उन लोगों पर भी जो तथाकथित पीली रेखा, आवासीय इमारतों, और आन्तरिक विस्थापितों के लिए बनाए गए तम्बुओं व आश्रय स्थलों की तरफ़ बढ़ रहे हैं…”
उन्होंने ग़ाज़ा में मानवीय आपदा की बढ़ती गम्भीरता की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए कहा है कि ऐसे हालात में बढ़ता सदमा, ग़ाज़ा में सबसे गम्बीर मानसिक स्वास्थ्य संकट बन गया है… दरअसल हर कोई सदमे में है, विशेष रूप में बच्चे.
वोल्कर टर्क ने मानवाधिकार दिवस के अवसर पर एक संवाददाता सम्मेलन में, इसराइली सेनाओं द्वारा किए जा रहे अभूतपूर्व हमलों और पश्चिमी तट में, यहूदी बाशिन्दों द्वारा फ़लस्तीनियों और उनकी ज़मीनों पर किए जा रहे हमलों पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है.
उन्होंने कहा, “यह समय है कि दबाव और पैरोकारी बढ़ाए जाएँ – ना कि आँखें मून्द ली जाएँ.”

समस्याओं से भरी एक दुनिया
वोल्कर टर्क ने काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्वी इलाक़े में लम्बे समय से जारी अस्थिरता पर भी गहरी चिन्ता व्यक्त की. वहाँ हाल के दिनों में भी M23 सशस्त्र गुट और देश की सशस्त्र सेनाओँ के दरम्यान झड़पों के कारण, बीती रात भी कीवू प्रान्त के दक्षिणी शहर उवीरा से हज़ारों लोगों के पलायन की ख़बरें मिलीं.
उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही दिन पहले डीआरसी व रवांडा ने, जून 2025 में हुए वाशिंगटन शान्ति समझौते पर अमल करने के संकल्प व्यक्त किए हैं.
ऐसे हालात में इस टकराव का दायरा बढ़ने के जोखिम पर गहरी चिन्ता व्यक्त की गई है.
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने, सूडान में युद्धापराध और मानवता के विरुद्ध सम्भावित अपराधों को भी अंजाम दिया जा रहा है, जहाँ युद्ध रुकने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे हैं.
वोल्कर टर्क ने कहा कि यूक्रेन में हमलों से आम आबादी को नुक़सान बढ़ रहा है. इस वर्ष अभी तक हताहत हुए लोगों की संख्या, वर्ष 2024 में इसी अवधि में हताहत हुए लोगों की संख्या से 24 प्रतिशत अधिक रही है.
उन्होंने कहा कि यूक्रेन में आम लोगों की पीड़ाओं का अन्त करने के लिए, तत्काल क़दम उठाए जाने होंगे.
Source: UN News Hindi
