ईरान: तेल भंडारों पर बमबारी के बाद, ‘ज़हरीली बारिश’ की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि ईरान में तेल भंडारण केन्द्रों पर इसराइली और अमेरिकी हमलों के बाद, देश की राजधानी तेहरान में हो रही ‘काली बारिश’, आम नागरिकों के लिए एक बड़ा ख़तरा है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने हताहत आम नागरिकों की बढ़ती संख्या, सामूहिक विस्थापन और बुनियादी ढाँचे को पहुँच रही क्षति के प्रति आगाह किया है. वहीं, समुद्री परिवहन मार्गों में आए व्यवधान से ईंधन और खाद्य सामान की क़ीमतों में भारी उछाल आने का जोखिम है.

अहम अपडेट, संक्षेप में

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि ईरान में तेल केन्द्रों पर की गई बमबारी से हमलों से ज़हरीली बारिश होने का ख़तरा है, जिसके स्वास्थ्य को गहरा नुक़सान पहुँच सकता है.
     
  • लेबनान में अस्पताल और अग्रिम पांत के राहतकर्मी असाधारण दबाव में काम कर रहे हैं. इसराइली हमलों और ज़मीनी सैन्य अभियान के बीच हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है.
     
  • विश्व खाद्य कार्यक्रम ने आगाह किया है कि हिंसक टकराव की वजह से भोजन और ईंधन की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं, जिससे मध्य पूर्व समेत दुनिया के अन्य क्षेत्रों में भूख संकट गहरा सकता है.
     
  • यूएन शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, लेबनान में अब तक 7 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, और अन्य देशों में भी लोग सुरक्षित आश्रय की तलाश में बेघर हुए हैं.

ईरान: तेहरान की हवा में घुले ज़हरीले रसायन 

हाल के दिनों में ईरान की राजधानी तेहरान में तेल प्रतिष्ठानों पर इसराइल और अमेरिका द्वारा हवाई हमले किए जाने की ख़बरें है, जिसके बाद इन भंडारों में आग और घना काला धुँआ निकलता दिखाई दिया.

इस धुँए में ज़हरीले रसायन में घुले होने की आशंका है, और बादलों के साथ मिलकर यह बारिश को अम्लीय बना सकता है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रवक्ता क्रिस्टियान लिंडमायर ने मंगलवार को बताया कि इसकी वजह से आम लोगों को श्वसन तंत्र सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं, और उनकी टीम निरन्तर अस्पतालों, और देश के स्वास्थ्य प्रशासन के साथ सम्पर्क में है. 

“ईरानी प्रशासन ने लोगों को अपने घरों के भीतर ही रहने का अलर्ट जारी किया है, विशेष रूप से तेल भंडारण केन्द्रों पर हुए हमलों के बाद.” 

बड़ी मात्रा में ज़हरीले हाइड्रोकार्बन, सल्फ़र ऑक्साइड और नाइट्रोजन के हवा में फैलने से उपजे स्वास्थ्य जोखिमों पर भी नज़र रखी जा रही है.

WHO प्रवक्ता ने कहा कि ईरान द्वारा बहरीन और सऊदी अरब में तेल प्रतिष्ठानों पर हवाई हमले किए जाने के समाचारों से भी चिन्ता है, जिससे इस क्षेत्र के व्यापक स्तर पर प्रदूषण की चपेट में आने की आशंका है. इसका श्वसन तंत्र पर असर पड़ने और जल के दूषित होने का जोखिम है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने इसराइल-अमेरिका द्वारा तेहरान में तेल प्रतिष्ठानों पर की गई बमबारी, और उसके स्वास्थ्य व पर्यावरणीय दुष्परिणामों पर चिन्ता व्यक्त की है. 

उन्होंने कहा कि वातावरण में ज़हरीले रसायन घुलने और उसके प्रभाव से गम्भीर सवाल उठे हैं कि क्या इन हमलों में अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों का पालन किया जा रहा है या नहीं. OHCHR प्रवक्ता ने कहा कि जिन स्थलों पर हमला किया गया, ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि उनका केवल सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.

‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ में व्यवधान

व्यापार एवं विकास पर यूएन एजेंसी (UNCTAD) के अनुसार, हिंसक टकराव की वजह से खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाज़ों के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ में समुद्री परिवहन पर भीषण असर हुआ है.

इससे दुनिया के अनेक हिस्सों में तेल, गैस, उर्वरक की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और यह आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ा जोखिम है.

इस संकरे जलमार्ग से वैश्विक तेल की क़रीब 20 फ़ीसदी आपूर्ति होती है और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (Liquefied Natural Gas) और उर्वरक की आपूर्ति के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है. 

सैन्य टकराव की वजह से, आने वाले दिनों में इन आवश्यक सामान की आपूर्ति में उथल-पुथल आने की आशंका व्यक्त की गई है.

UNCTAD ने बताया है कि तेल की क़ीमतें, प्रति बैरल 90 डॉलर से ऊपर पहुँच गई है, जबकि माल ढुलाई की दर, युद्ध के जोखिम की वजह से बीमा प्रीमियम और समुद्री ईंधन की क़ीमतों में भी उछाल आया है.

इसके अलावा, जोखिम भरे जलमार्गों से गुज़रने के लिए बीमा राशि में बढ़ोत्तरी हुई है और अब प्रति कंटेनर 2 से 4 हज़ार डॉलर की अतिरिक्त लागत चुकानी पड़ रही है.

लेबनान: फिर से एक संकट का सदमा

लेबनान में इसराइली सैन्य बलों द्वारा किए गए हमलों और आम नागरिकों को जगह छोड़कर चले जाने के आदेशों के बीच, बीते 24 घंटों में 1 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं. 

कुल मिलाकर, मध्य पूर्व में भड़की लड़ाई के बाद से अब तक, 7 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर हुए हैं.

लेबनान में यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की प्रतिनिधि कैरोलिना लिंडहॉल्म बिलिंग के अनुसार, 2024 को हुए हिंसक टकराव की तुलना में, इस बार लेबनान में कहीं अधिक तेज़ी से विस्थापन हुआ है.

“हम सड़कों पर खड़ी कारों को देखते हैं, जिनमें लोग सो रहे हैं. अधिकाँश बहुत जल्दी में, लगभग खाली हाथ अपने घर छोड़कर भाग गए.”

“वे बेरूत , माउंट लेबनान क्षेत्र, उत्तरी लेबनान और बेका के कुछ हिस्सों में सुरक्षा की तलाश कर रहे हैं.” यूएन एजेंसी अधिकारी ने सोमवार को राजधानी बेरूत के एक आश्रय स्थल में राहत बिताई, जहाँ उनकी मुलाक़ात 90 वर्ष से अधिक आयु वाली एक महिला से हुई. 

उनके परिवार के 11 सदस्य वर्ष 2024 में मारे गए थे. “वह फिर से विस्थापित हो गई हैं. उसी स्कूल में रह रही हैं, जिसे 2024 में एक आश्रय केन्द्र बना दिया गया था, और अब 2026 में भी…”

UNHCR प्रतिनिधि के अनुसार, ऐसे उदाहरण वास्तव में भय, अनिश्चितता और बार-बार पेश आने वाले सदमे को दर्शाते हैं, जिनका सामना फ़िलहाल लाखों लोग कर रहे हैं.

Source : UN News

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