गाज़ा पट्टी इस वक्त सिर्फ़ युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि एक गहराते मानवीय संकट का चेहरा बन चुका है। World Health Day के दिन जारी गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान ने हालात की भयावह सच्चाई सामने रख दी! यहाँ का स्वास्थ्य तंत्र अब लगभग ढह चुका है।
दवाइयों का आधा स्टॉक खत्म हो चुका है। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री आधे से भी ज्यादा घट गई है, और लैब टेस्ट कराने तक के संसाधन लगभग खत्म होने की कगार पर हैं। इसका मतलब साफ है! जो लोग ज़िंदा बच भी रहे हैं, उनका इलाज अब लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
सबसे दर्दनाक असर उन मरीजों पर है जिन्हें लगातार इलाज की ज़रूरत होती है – जैसे कैंसर के मरीज। करीब 4,100 लोग हर दिन इस इंतज़ार में हैं कि उन्हें ज़रूरी दवाइयाँ मिलें, लेकिन 61% दवाइयाँ ही गायब हैं। सोचिए, बीमारी से लड़ रहे लोग अब सिस्टम की कमी से भी लड़ रहे हैं।
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि दिल की बड़ी सर्जरी जैसी ज़रूरी प्रक्रियाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं। आंखों के ऑपरेशन के लिए भी लगभग कोई संसाधन नहीं बचा। अस्पताल खुद “मरीज” बन चुके हैं—55% बेड कम हो गए, 22 अस्पताल और 90 हेल्थ सेंटर बंद हो चुके हैं। डायलिसिस जैसे जीवनरक्षक इलाज भी संकट में हैं—676 मरीजों के लिए सिर्फ 108 मशीनें बची हैं। हर दिन उनके लिए एक नई चुनौती है।
और यह सिर्फ इलाज की कमी की कहानी नहीं है यह अधूरी ज़िंदगियों की कहानी भी है। 5,000 लोग अपने अंग खो चुके हैं, जिनमें 980 बच्चे शामिल हैं। उन्हें सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि लंबे पुनर्वास की जरूरत है जो फिलहाल एक दूर का सपना लगता है।
जो लोग गाज़ा से बाहर इलाज के लिए जाना चाहते हैं, उनकी हालत और भी दर्दनाक है। 21,000 से ज्यादा लोग इंतज़ार में हैं, और 1,517 लोग सिर्फ इसलिए मर गए क्योंकि वे समय पर बाहर नहीं जा सके।
इसी बीच World Health Organization ने भी सुरक्षा कारणों से मरीजों को बाहर निकालने की प्रक्रिया रोक दी है। संगठन के प्रमुख Tedros Ghebreyesus के मुताबिक एक कर्मचारी की मौत के बाद यह फैसला लिया गया। इसका मतलब जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी, वह भी फिलहाल थम गई है।
गाज़ा की ये तस्वीर सिर्फ आंकड़ों की नहीं है यह हर उस इंसान की कहानी है जो इलाज की कमी में धीरे-धीरे हार रहा है। अगर जल्द मदद नहीं पहुंची, तो यह संकट और गहरा जाएगा और शायद बहुत देर हो जाएगी।
