पाकिस्तान में गरीब और मजबूर लोगों का इस्तेमाल करके अवैध तरीके से किडनी बेची जा रही है। यह समस्या खासकर पंजाब के ईंट-भट्टा उद्योग में ज्यादा देखने को मिलती है, जहां मजदूर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
कैसे फंसते हैं मजदूर?
ईंट-भट्टों पर “पेशगी” सिस्टम चलता है। इसमें मजदूर पहले पैसे उधार लेते हैं और फिर कर्ज चुकाने के लिए काम करते रहते हैं। लेकिन दिक्कत ये है कि:
- उन्हें बहुत कम पैसे मिलते हैं
- कर्ज पर बहुत ज्यादा ब्याज लगता है
- कर्ज खत्म होने की बजाय बढ़ता ही जाता है
उदाहरण के तौर पर, एक परिवार दिनभर में 1000 ईंटें बनाकर भी हर व्यक्ति सिर्फ़ 75–88 रुपये कमाता है। ऐसे में कर्ज चुकाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
दबाव और मजबूरी
जब मजदूर कर्ज नहीं चुका पाते, तो भट्टा मालिक उन पर दबाव डालते हैं। उन्हें भट्टे के पास ही रहने को मजबूर किया जाता है, महिलाओं के साथ गलत व्यवहार और हिंसा की घटनाएं भी होती हैं! धीरे-धीरे मजदूर इतनी मजबूरी में आ जाते हैं कि उन्हें कोई रास्ता नहीं दिखता।
अंग बेचने के लिए कैसे मजबूर किया जाता है?
इसी हालत का फायदा उठाकर दलाल मजदूरों को किडनी बेचने के लिए मनाते हैं। उन्हें बताया जाता है कि: इससे उनका कर्ज खत्म हो जाएगा और वे अपने परिवार के लिए “त्याग” कर रहे हैं मजबूरी में कई लोग मान जाते हैं। कुछ लोग तो अपने बच्चों के अंग बेचने तक के बारे में सोचने लगते हैं। और इस सब की समस्याएं यह है की –
- ऑपरेशन कितना खतरनाक होता है?
- सर्जरी अक्सर गैर-कानूनी जगहों पर होती है
- सही इलाज और आराम नहीं मिलता
- तुरंत काम पर लौटना पड़ता है
सबसे बड़ी बात— किडनी लाखों रुपये में बिकती है, लेकिन मजदूरों को सिर्फ़ 1000–3000 डॉलर ही मिलते हैं, और कई बार वो भी नहीं।
चौंकाने वाले मामले
एक बार पुलिस ने 14 साल के बच्चे को बचाया, जिसकी किडनी निकाली जा चुकी थी। यह भी सामने आया कि अमीर विदेशी लोग, खासकर खाड़ी देशों से, पाकिस्तान आकर ऐसे अवैध ट्रांसप्लांट करवाते हैं।
कानून क्यों काम नहीं कर पा रहा?
पाकिस्तान ने 2010 में कानून बनाया, लेकिन उसमें: किडनी बेचने वाले को भी अपराधी माना जाता है, इस वजह से पीड़ित लोग डर के कारण सामने नहीं आते। साथ ही, यह नेटवर्क कई देशों में फैला है, जिससे कार्रवाई करना और मुश्किल हो जाता है।
असली वजह क्या है?
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह गरीबी है। जब लोगों के पास पैसे नहीं होते, तो वे मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
निष्कर्ष
यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या है। जब तक गरीब लोगों की हालत नहीं सुधरेगी और कानून सख्ती से लागू नहीं होंगे, तब तक यह खतरनाक धंधा चलता रहेगा।
