ईद की खुशियाँ छीन ली गईं: इज़रायली जेलों में 9,400 से ज़्यादा फिलिस्तीनी कैदी बदहाल ज़िंदगी जीने को मजबूर

जब पूरी दुनिया ईद अल-अज़हा की खुशियाँ मना रही है, वहीं इज़रायली जेलों में बंद हज़ारों फिलिस्तीनी कैदियों के लिए यह त्योहार दर्द, भूख और तन्हाई की एक और लंबी रात बन गया है।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक़, 9,400 से ज़्यादा फिलिस्तीनी कैदी इस बार ईद ऐसे हालात में मना रहे हैं जहाँ उनसे उनकी मुस्कान, उनके अपने और उनकी इंसानी ज़िंदगी तक छीन ली गई है। कुछ साल पहले तक जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदी भी ईद की छोटी-छोटी खुशियाँ तलाश लिया करते थे। सीमित साधनों के बावजूद वे रंगीन कागज़ और कपड़ों के टुकड़ों से बैरकों को सजाते, अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनते और थोड़ी-सी मिठाई बनाकर एक-दूसरे के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करते थे। लेकिन 7 अक्टूबर 2023 के बाद सब कुछ बदल गया। अब वही ईद उनके लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का प्रतीक बन चुकी है।

करीब तीन साल से कैदियों को अपने परिवारों से मिलने नहीं दिया गया। जिन माँओं की आँखें अपने बेटों का इंतज़ार कर रही हैं, जिन बच्चों ने अपने पिता को गले लगाने की उम्मीद लगा रखी थी, वे सब इंतज़ार में हैं। परिवारों की मुलाक़ातें सिर्फ़ एक मुलाक़ात नहीं थीं, बल्कि कैदियों के लिए जीने का सहारा थीं। उन्हीं मुलाक़ातों के जरिए कपड़े, कंबल और थोड़ा-बहुत खाना पहुँचता था। अब जेल कैंटीन भी बंद कर दी गई है और कैदी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी तरस रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जेलों में कैदियों के साथ लगातार अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उन्हें हथकड़ियों में बाँधकर घंटों ज़मीन पर फेंका जाता है, पीटा जाता है और गैस स्प्रे किया जाता है। घायल होने के बावजूद उन्हें इलाज नहीं मिलता। सुबह से देर रात तक उनसे गद्दे और कंबल तक छीन लिए जाते हैं। महिला कैदियों की हालत भी बेहद दर्दनाक बताई गई है। उन्हें मारपीट, गालियाँ, गैस हमलों और एकांत कारावास का सामना करना पड़ रहा है। भूख, भीड़भाड़ और अपमान के बीच वे हर दिन गुजारने को मजबूर हैं। जेल प्रशासन भूख को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है ताकि कैदियों के शरीर कमजोर पड़ जाएँ और बीमारियाँ बढ़ती जाएँ। इलाज की कमी के कारण मामूली बीमारियाँ भी गंभीर रूप ले रही हैं। स्केबीज़ जैसी संक्रामक बीमारी हजारों कैदियों में फैल चुकी है। कई कैदी महीनों से फोड़े, घाव और संक्रमण की तकलीफ झेल रहे हैं।

“पैलेस्टाइन सेंटर फॉर प्रिजनर स्टडीज़” ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि फिलिस्तीनी कैदियों को इस अमानवीय स्थिति से बचाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और इज़रायली जेलों में हो रहे अत्याचारों को रोका जाए। इज़रायल इस समय 9,400 से अधिक फिलिस्तीनी कैदियों को जेलों और हिरासत शिविरों में बंद किए हुए है। इनमें 86 महिलाएँ और 3,376 प्रशासनिक हिरासत में रखे गए लोग शामिल हैं। वहीं 1,283 कैदियों को “अनलॉफुल कॉम्बैटेंट्स” की श्रेणी में रखा गया है, जिसे रिपोर्ट ने मनमानी हिरासत और जबरन गुमशुदगी को बढ़ावा देने वाला क़ानूनी ढाँचा बताया है।

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