लेबनान के दक्षिणी हिस्से में इसराइली सैन्य बलों के हमलों और राजधानी बेरूत में व्याप्त तनाव की वजह से स्थानीय परिवार भय और अनिश्चितता में जीवन गुज़ार रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग सुरक्षा की तलाश में बेघर होने के लिए मजबूर हैं और महिलाएँ व लड़कियाँ विकट परिस्थितियों से जूझ रही हैं.
यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मामलों के लिए यूएन संगठन (UNFPA) ने मंगलवार को चेतावनी दी है कि युद्धविराम लागू होने के बावजूद, हिंसा व विस्थापन जारी है और महिलाओं व लड़कियों को इसकी एक भयावह क़ीमत चुकानी पड़ रही है.
बीते सप्तांहात, दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों में यूएन एजेंसी द्वारा समर्थित एक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र क्षतिग्रस्त हो गया था, जोकि महिलाओं व लड़कियों के लिए एक सुरक्षित स्थल की भूमिका निभा रहा था.
लेबनान में UNFPA की प्रतिनिधि अनन्दिता फ़िलिपोज़ ने मिस्र की राजधानी काहिरा से न्यूयॉर्क में पत्रकारों को वीडियो लिंक के ज़रिए बताया कि यह इस क्षेत्र में अहम सेवाएँ मुहैया कराने वाले चुनिन्दा केन्द्रों में था.
एक अन्य हमले में मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ प्रदान कर रहे एक अन्य सार्वजनिक अस्पताल को क्षति पहुँची. लेबनान में विस्थापित हुए लोगों में 13.5 हज़ार गर्भवती महिलाएँ भी हैं, जिनमें 1.5 हज़ार महिलाएँ अगले 30 दिनों के भीतर माँ बन सकती हैं.
असुरक्षित आश्रय स्थल
यूएन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि लगभग 1.5 हज़ार महिलाएँ अब भी दक्षिणी लेबनान में फँसी हुई हैं और उनके पास कुशल देखभाल या बच्चों को जन्म देने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं हैं.
अनन्दिता फ़िलिपोज़ ने कहा कि जब मातृत्व वॉर्ड और अस्पताल क्षतिग्रस्त व ध्वस्त हो जाते हैं तो ये गर्भवती महिलाएँ हैं, जिन्हें जीवनरक्षक सेवाएँ नहीं मिल पाती हैं.
UNFPA प्रतिनिधि शरण स्थलों में बदतरीन परिस्थितियों पर भी गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जहाँ अत्यधिक भीड़ है, प्रकाश की व्यवस्था नहीं है, निजता का अभाव है और साफ़-सफ़ाई की असुरक्षित सुविधा है. इन परिस्थितियों में लिंग-आधारित हिंसा होने का जोखिम बढ़ जाता है, विशेष रूप से किशोर लड़कियों, महिला मुखिया वाले घर-परिवारों, गर्भवती महिलाओं और विकलांगजन के लिए.
यूएन एजेंसी इन चुनौतियों के बावजूद, स्थानीय साझीदारों और लेबनान के प्रशासन के साथ मिलकर मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएँ, मनोसामाजिक समर्थन और संरक्षण सहायता मुहैया कराने के लिए प्रयासरत है.
वित्तीय संसाधनों की अपील
अनन्दिता फ़िलिपोज़ ने आगाह किया है कि तत्काल वित्तीय मदद के अभाव में, इन हालात के मानवीय नतीजे तेज़ी से बिगड़ सकते हैं.
इसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसी ने अगस्त महीने तक अपना सहायता अभियान जारी रखने के लिए 2.5 करोड़ डॉलर की अपील की है. संगठन के अनुसार, यदि धनराशि का अभाव बना रहा तो हज़ारों गर्भवती महिलाओं के पास प्रसव और आपात मातृत्व देखभाल के लिए कुशल सेवाएँ मुहैया नहीं हो पाएंगी.
इसके अलावा, दूरदराज़ के इलाक़ों में सेवारत मोबाइल टीम को अपने अभियान के दायरे में कमी लाने या उसे पूरी तरह रोकने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
UNFPA प्रतिनिधि ने कहा कि अभियान के स्तर में कमी लाने का अर्थ है, 75 हज़ार महिलाओं को लिंग-आधारित हिंसा से बचाना, और उनके लिए सुरक्षित स्थलों को सुनिश्चित करना. एक ऐसे समय में जब उन्हें इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है.
Source : UN News
