संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सम्भावित युद्धविराम समझौते पर शुक्रवार को अस्पष्ट ख़बरों व चर्चाओं के बीच फ़िलहाल घटनाक्रम पर नज़र रखी जा रही है.
यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक से न्यूयॉर्क मुख्यालय में नियमित पत्रकार वार्ता के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की उस घोषणा के बारे में सवाल किया गया था, जिसके अनुसार दोनों पक्ष 100 दिनों से अधिक समय से चले आ रहे टकराव को रोकने के लिए शान्ति समझौते के अन्तिम मसौदे पर तैयार हो गए हैं.
यूएन प्रवक्ता ने कहा कि हमने उस घोषणा को देखा है. “हमने अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा कल की गई घोषणओं को भी देखा था.”
“हालात की गम्भीरता को देखते हुए और यह समझते हुए कि हम पहले भी इतना नज़दीक पहुँच चुके हैं, हम अभी कोई टिप्पणी करने से रुकना चाहेंगे, लेकिन हम जो कुछ सुन रहे हैं उसके भाव व लहज़े से हम उत्साहित हैं.”
28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान में सैन्य व परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी किए जाने के बाद ईरान ने भी ड्रोन व मिसाइल हमले किए थे, जिनमें मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य स्थलों व खाड़ी देशों को निशाना बनाया गया. पाकिस्तान ने इस युद्ध पर विराम लगाने में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई है.
दूरगामी नतीजे
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अनेक अवसरों पर मध्य पूर्व में भड़के हिंसक टकराव की निन्दा करते हुए आगाह किया है कि यह व्यापक क्षेत्र में संकट का हिस्सा है.
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्याप्त असुरक्षा की वजह से जहाज़ों की आवाजाही ठप है, जिससे ईंधन, खाद्य सामग्री व अन्य अहम सामान की आपूर्ति में विशाल व्यवधान आया है. इस जलमार्ग के ज़रिए, वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 25 फ़ीसदी और द्रव्यीकृत प्राकृतिक गैस व उर्वरक के बड़े हिस्से की आपूर्ति की जाती है.
इस व्यवधान के दुनिया भर में नतीजे सामने आए हैं और यूएन खाद्य एवं कृषि संगठन ने आशंका जताई है कि अगले 6 से 12 महीनों के दौरान वैश्विक खाद्य क़ीमतों में बड़ा संकट नज़र आ सकता है.
हज़ारों समुद्री नाविक भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फँसे हुए हैं और वहाँ होने वाली गोलाबारी में अब तक 14 कर्मचारी मारे गए हैं. इस सप्ताह एक जहाज़ पर हुए हमले में तीन भारतीय समुद्री नाविक की जान गई थी
Source : UN News
