नई दिल्ली: NEET-UG री-एग्जाम की तारीख भले ही नजदीक आ गई हो, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं है। पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस ने एक फैसला लिया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश के प्रमुख एजुकेशनल हब्स में जाकर खुद ‘छात्र सम्मेलन’ करेंगे और प्रभावित युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस देशव्यापी अभियान के पहले फेज का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है।
राहुल गांधी का ‘छात्र सम्मेलन’ शेड्यूल
इस अभियान के तहत राहुल गांधी अलग-अलग तारीखों पर इन शहरों में युवाओं के बीच पहुंचेंगे:-
- 17 जून: कोटा (राजस्थान) – यहीं से अभियान की शुरुआत होगी
- 10 जुलाई: प्रयागराज
- 11 जुलाई: पटना
- 14 जुलाई: दिल्ली
कौन-कौन होगा शामिल?
इन सम्मेलनों में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा, युवा संगठन, शिक्षक और इस परीक्षा ‘घोटाले’ से सीधे तौर पर प्रभावित पीड़ित परिवार भी शामिल होंगे।
कांग्रेस की 4 प्रमुख मांगें (Targeting the Government)
केसी वेणुगोपाल के अनुसार, राहुल गांधी इन सम्मेलनों के जरिए विपक्ष की आवाज़ को सड़कों पर ले जाएंगे। इस आंदोलन के जरिए सरकार के सामने ये मुख्य मांगें रखी जाएंगी:
- NEET का विकेंद्रीकरण किया जाए ।
- छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क (फीस) पूरी तरह खत्म हो।
- पेपर लीक रैकेट में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- सरकार के उच्चतम स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए।
कैसे चलेगा यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन?
यह रणनीति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मार्गदर्शन और राहुल गांधी के नेतृत्व में 8 जून की बैठक (जिसमें महासचिव, प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष शामिल थे) में तैयार की गई थी। इस आंदोलन का मकसद NEET धांधली, बेरोजगारी, महंगाई और चुनावों से पहले ‘सीट चोरी’ जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरना है।
जमीनी स्तर पर रणनीति:
मजबूत नेटवर्क: NSUI, युवा कांग्रेस, प्रदेश और जिला कांग्रेस कमेटियों (PCC & DCC) के जरिए स्थानीय स्तर पर छात्रों को एकजुट किया जाएगा।
आउटरीच प्रोग्राम: कोचिंग सेंटरों, यूनिवर्सिटीज, स्कूलों और युवा केंद्रों पर जाकर सीधा संवाद किया जाएगा।
डिजिटल कैंपेन: सोशल मीडिया अभियान, लाइव स्क्रीनिंग और कैंपस कनेक्ट के जरिए इस आंदोलन को राजनीतिक जुड़ाव से ऊपर उठकर एक साझा मंच बनाया जाएगा।
