ग़ाज़ा: युद्धविराम के दौरान भी 265 बच्चों की मौत, औसतन हर दिन 1 बच्चे की मृत्यु

संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों ने ग़ाज़ा की स्थिति पर नई चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अक्टूबर 2025 में युद्धविराम की घोषणा के बाद से अब तक वहाँ 265 फ़लस्तीनी बच्चों की मौत हो चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने शुक्रवार को कहा कि जो अवधि संयम और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली माना जा रही थी, उसमें पिछले 8 महीनों से अधिक समय के दौरान औसतन हर दिन 1 बच्चे की जान गई है. 

उन्होंने इसे बेहद दुखद और अस्वीकार्य स्थिति बताया है.

प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी दी कि इन बच्चों की मौत किसी युद्धक्षेत्र में नहीं हुई, बल्कि वे अपने घरों, स्कूलों या फ़ुटबॉल खेलते व मछलियाँ पकड़ते समय हमलों का शिकार बने.

उन्होंने बताया कि इन बच्चों को गोली मारी गई, बमबारी में उनकी जान गई या फिर इसराइली बल द्वारा संचालित ड्रोन हमलों में वे मारे गए.

बढ़ता ख़तरा

ग़ाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक लगभग 1 हज़ार फ़लस्तीनी लोग मारे गए हैं और 3 हज़ार 100 से अधिक घायल हुए हैं, जिनमें 265 बच्चों की मौतें भी शामिल हैं.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने कहा कि इसराइल निर्धारित तथाकथित ‘पीली रेखा’ और ‘नारंगी रेखा’ सीमाओं का दायरा लगातार बढ़ाता जा रहा है. इन क्षेत्रों के निकट जाने भर से लोगों के लिए जान का ख़तरा उत्पन्न हो जाता है.

प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने कहा कि लगातार बदलती इन सीमा रेखाओं और जवाबदेही के अभाव के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जानें जा रही है. इन मौतों के लिए अधिकांश मामलों में इसराइली बल ज़िम्मेदार हैं.

अभूतपूर्व मानवीय संकट

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठनों ने बार-बार चेतावनी दी है कि अक्टूबर 2023 में हमास के नेतृत्व में इसराइल पर हुए आतंकी हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध ने, ग़ाज़ा में अभूतपूर्व मानवीय संकट उत्पन्न कर दिया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ग़ाज़ा में कोई भी अस्पताल पूरी तरह से कार्यरत नहीं है, जबकि यूनीसेफ़ का कहना है कि 11 लाख बच्चों के लिए स्वच्छ पानी की उपलब्धता अब भी रोज़ाना की अनिश्चितता बनी हुई है.

वर्तमान में ग़ाज़ा में लगभग 19 लाख लोग विस्थापित हैं, जिनमें से अनेक को बार-बार अपना घर छोड़ना पड़ा है, जबकि 12 लाख से अधिक लोग अपने घरों से वंचित हो चुके हैं.

लेबनान में गम्भीर हालात

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) के प्रवक्ता येंस लाएर्के ने लेबनान में रातभर जारी हिंसा पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है.

ख़बरों के अनुसार, लेबनान के दक्षिणी इलाक़े में हिज़बुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाकर किए गए इसराइली हवाई हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है.

उन्होंने कहा कि बढ़ती हिंसा किसी के हित में नहीं है और लेबनान (विशेष रूप से दक्षिणी इलाक़ों में) मानवीय ज़रूरतें पहले से ही बेहद गम्भीर हैं. 

उनके अनुसार, लोगों को नुक़सान पहुँचाना और तबाही मचाना जितना आसान है, उससे कहीं अधिक कठिन बात, उनके जीवन को फिर से पटरी पर लाना, उन्हें घरों तक लौटाना और उनकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करना है.

यूनीसेफ़ के अनुसार, हिंसा, विस्थापन और नुक़सान के बार-बार के अनुभवों के कारण, लेबनान में 7 लाख 70 हज़ार से अधिक बच्चे गहरे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं.

Source : UN news

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