फ़िलिस्तीनी बंदी इमाद सरहान की मौत के बाद ‘Who Is Next?’ अभियान शुरू, बीमार क़ैदियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

वेस्ट बैंक: इज़रायली जेल में फ़िलिस्तीनी बंदी इमाद सरहान की मौत के बाद फ़िलिस्तीनी कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले पैलेस्टिनियन सेंटर फ़ॉर द डिफेंस ऑफ़ प्रिज़नर्स ने “Who Is Next?” नामक एक मीडिया अभियान शुरू किया है। संगठन का कहना है कि यह अभियान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देने और जेलों में बंद बीमार क़ैदियों की बिगड़ती स्थिति की ओर तत्काल ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

केंद्र के अनुसार, ग़ज़ा पर जारी इज़रायली युद्ध शुरू होने के बाद से हिरासत में जान गंवाने वाले फ़िलिस्तीनी क़ैदियों की संख्या 90 तक पहुँच गई है। वहीं, वर्ष 1967 से अब तक इज़रायली हिरासत में मारे गए फ़िलिस्तीनी बंदियों की कुल संख्या 327 दर्ज की गई है।

गुरुवार को जारी बयान में केंद्र की निदेशक लीना अल-तवील ने कहा कि इज़रायली जेलों के भीतर की परिस्थितियों को लेकर बनी अंतरराष्ट्रीय चुप्पी बेहद चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा हालात पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में और क़ैदियों की मौत हो सकती है।

अल-तवील के मुताबिक, अभियान का शीर्षक “Who Is Next?” एक गंभीर सवाल और बढ़ती चिंता को सामने लाता है। उनका कहना है कि जेलों में कथित तौर पर जारी व्यवस्थित चिकित्सीय उपेक्षा और बढ़ते दुर्व्यवहार के कारण विशेष रूप से बीमार क़ैदियों की जान लगातार ख़तरे में है।

उन्होंने कहा कि इमाद सरहान की मौत ने बीमार बंदियों के भविष्य को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके अनुसार, जेलों के भीतर की परिस्थितियाँ अब सिर्फ़ कठिन नहीं रहीं, बल्कि क़ैदियों के जीवन के लिए सीधा ख़तरा बन चुकी हैं।

केंद्र ने आरोप लगाया है कि फ़िलिस्तीनी बंदियों को अभूतपूर्व दंडात्मक उपायों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें एकांत कारावास, भोजन से वंचित करना, शारीरिक हमले और चिकित्सीय सुविधाओं से इंकार जैसी परिस्थितियाँ शामिल हैं।

लीना अल-तवील ने कहा कि ये हालात सैकड़ों बीमार क़ैदियों को लगातार जोखिम में डाल रहे हैं और उनकी स्वास्थ्य समस्याओं को प्रभावी रूप से “धीमी मौत की सज़ा” में बदल रहे हैं।

एक सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान के दौरान बीमार बंदियों की स्वास्थ्य और मानवीय स्थिति को प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके साथ ही उनकी दैनिक परेशानियों को दस्तावेज़ित किया जाएगा और जेलों में कथित चिकित्सीय उपेक्षा के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की कोशिश की जाएगी।

केंद्र ने संयुक्त राष्ट्र, इंटरनेशनल कमेटी ऑफ़ द रेड क्रॉस और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। संगठन ने मांग की है कि बीमार फ़िलिस्तीनी क़ैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, कथित दुर्व्यवहार रोकने के लिए इज़रायली अधिकारियों पर दबाव बनाया जाए और सभी बंदियों को आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।

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