गाजा में मानवीय संकट गहराया: 75 हजार से ज़्यादा बच्चे हुए अनाथ, 45 हजार महिलाएं बनीं विधवा

गाजा में युद्ध के असर लगातार गहराते जा रहे हैं। सामाजिक विकास मंत्रालय का कहना है कि क्षेत्र इस समय अभूतपूर्व मानवीय और पुनर्वास संकट का सामना कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक, 80 प्रतिशत से अधिक आबादी अपने घरों से विस्थापित हो चुकी है, जबकि युद्ध के कारण हजारों बच्चे अनाथ हो गए हैं, बड़ी संख्या में महिलाएं विधवा हुई हैं और कई लोग अपने परिवार के इकलौते जीवित सदस्य बनकर रह गए हैं।

मंत्रालय के अवर सचिव रियाद अल-बायतार के अनुसार, युद्ध में 75 हजार से अधिक बच्चे अपने एक या दोनों माता-पिता को खो चुके हैं। इसके अलावा 68 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जो अपने परिवार के इकलौते जीवित सदस्य हैं, जिनमें बच्चे और वयस्क दोनों शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि गाजा में 45 हजार महिलाएं विधवा हैं। इनमें 28 हजार महिलाएं हालिया युद्ध के दौरान विधवा हुईं, जबकि करीब 8 हजार महिलाएं 7 अक्टूबर 2023 के बाद विधवा हुई हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है।

मंत्रालय के मुताबिक, गाजा के 80 प्रतिशत परिवार अपने घर खो चुके हैं और अब राहत शिविरों, सरकारी स्कूलों, यूएनआरडब्ल्यूए (UNRWA) के स्कूलों या टेंटों में रहने को मजबूर हैं।

करीब 10 लाख लोग, जो गाजा की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं, आधिकारिक राहत शिविरों में रह रहे हैं। बाकी आधी आबादी आधिकारिक शिविरों के बाहर है। केवल लगभग 10 प्रतिशत लोग ही क्षतिग्रस्त या आंशिक रूप से तबाह घरों में रह रहे हैं, जो सुरक्षित आश्रय नहीं दे पा रहे हैं।

मंत्रालय का कहना है कि संघर्षविराम शुरू होने के बाद भी प्रतिदिन केवल 120 से 150 राहत ट्रक ही गाजा पहुंच रहे हैं, जबकि ज़रूरत इससे कहीं अधिक है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के आंकड़ों के अनुसार, गाजा के लिए आवश्यक कुल मानवीय सहायता का केवल 25 प्रतिशत फंड ही उपलब्ध हो पाया है। इसके चलते सामुदायिक रसोइयों में रोज़ केवल 3 लाख भोजन तैयार हो रहे हैं, जबकि प्रतिदिन लगभग 10 लाख भोजन की आवश्यकता है।

मंत्रालय का कहना है कि आवश्यक फंडिंग का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अभी तक उपलब्ध नहीं हो सका है, जिसके कारण राहत और पुनर्वास कार्य पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो पाए हैं।

मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया कि इज़राइल सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के माध्यम से मानवीय संगठनों के कामकाज पर नियंत्रण रख रहा है, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

युद्ध और बुनियादी ढांचे की तबाही के कारण गाजा में सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाएं या तो पूरी तरह ठप हो चुकी हैं या बेहद सीमित स्तर पर संचालित हो रही हैं। महंगाई, आर्थिक ठहराव और सरकारी कर्मचारियों के अनियमित वेतन ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि कुछ स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने आवश्यक अनुमति के बिना लोगों का व्यक्तिगत डेटा एकत्र किया है, जिससे निजता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

अंत में मंत्रालय ने बताया कि नागरिक रजिस्टर से जुड़ा एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है, ताकि लोगों की जानकारी लगातार अपडेट की जा सके और मानवीय सहायता का वितरण अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाया जा सके।

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