डॉ. शुजात अली क़ादरी
हर वर्ष कक्षा 12 की परीक्षाओं के परिणाम घोषित होते ही लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सामने एक ऐसा प्रश्न खड़ा हो जाता है, जिसका उत्तर केवल अगले तीन-चार वर्षों को नहीं, बल्कि पूरे जीवन की दिशा को प्रभावित करता है आगे क्या करें?
इंजीनियरिंग, मेडिकल, कानून, सिविल सेवा, कॉमर्स, मीडिया, स्टार्टअप, विदेश में उच्च शिक्षा या कोई अन्य क्षेत्र—विकल्पों की कोई कमी नहीं है। लेकिन विकल्प जितने अधिक होते हैं, सही निर्णय लेना उतना ही कठिन हो जाता है। दुर्भाग्य से हमारे समाज में आज भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी रुचि और क्षमता के बजाय सामाजिक दबाव, पारिवारिक अपेक्षाओं या दोस्तों की नकल करते हुए करियर का चुनाव कर लेते हैं। यही कारण है कि आगे चलकर अनेक युवा अपने चुने हुए पेशे से संतुष्ट नहीं दिखाई देते।
आज आवश्यकता इस बात की है कि करियर को केवल नौकरी प्राप्त करने का माध्यम न समझा जाए, बल्कि उसे व्यक्ति के व्यक्तित्व, रुचि और जीवन के उद्देश्य से जोड़कर देखा जाए।
करियर की शुरुआत स्वयं को पहचानने से होती है। प्रत्येक विद्यार्थी को सबसे पहले स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि उसे किस विषय में रुचि है, किस प्रकार का कार्य उसे आनंद देता है, उसकी सबसे बड़ी क्षमता क्या है और वह भविष्य में स्वयं को किस भूमिका में देखना चाहता है। यदि इन प्रश्नों का ईमानदारी से उत्तर खोज लिया जाए, तो करियर का आधा रास्ता स्वयं स्पष्ट हो जाता है।
अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि केवल अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ही सफल होते हैं। जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है। निश्चित रूप से अच्छे अंक अवसरों के द्वार खोलते हैं, लेकिन सफलता केवल परीक्षा के परिणामों से तय नहीं होती। मेहनत, अनुशासन, संवाद कौशल, नई चीजें सीखने की इच्छा और निरंतर आत्म-विकास ही किसी भी व्यक्ति को दीर्घकालिक सफलता दिलाते हैं। इतिहास ऐसे हजारों उदाहरणों से भरा पड़ा है, जहाँ साधारण शैक्षणिक परिणाम वाले लोगों ने असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
वर्तमान समय में करियर के अवसर भी पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुके हैं। विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए डॉक्टर और इंजीनियरिंग के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मेसी, पर्यावरण विज्ञान, रक्षा सेवाएँ, अनुसंधान और एविएशन जैसे अनेक क्षेत्र उपलब्ध हैं। इसी प्रकार कॉमर्स के विद्यार्थियों के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कंपनी सेक्रेटरी, कॉस्ट अकाउंटेंसी, बैंकिंग, वित्तीय प्रबंधन, निवेश और उद्यमिता के क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं।
दूसरी ओर, कला एवं मानविकी के विद्यार्थियों के लिए भी अवसरों का विशाल संसार खुल चुका है। सिविल सेवा, न्यायिक सेवा, पत्रकारिता, मनोविज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध, सार्वजनिक नीति, शिक्षा, शोध, सामाजिक विज्ञान और भाषा अध्ययन जैसे क्षेत्र आज अत्यंत प्रतिष्ठित और संभावनाओं से भरपूर हैं। इसलिए यह धारणा पूरी तरह गलत है कि आर्ट्स पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पास सीमित विकल्प होते हैं।
दुनिया तेजी से बदल रही है। आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, ड्रोन टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल मार्केटिंग, यूआई/यूएक्स डिज़ाइन और कंटेंट क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएँ विकसित होंगी। इसलिए विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक डिग्रियों तक सीमित रहने के बजाय भविष्य की आवश्यकताओं को भी समझना होगा।
आज के रोजगार बाजार की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। अधिकांश संस्थान और कंपनियाँ अब उम्मीदवार के व्यवहार, संवाद क्षमता, नेतृत्व कौशल, टीम में काम करने की क्षमता, कंप्यूटर दक्षता, भाषा पर पकड़ और समस्या समाधान की योग्यता का भी मूल्यांकन करती हैं। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व और व्यावहारिक कौशल के विकास पर भी समान ध्यान देना चाहिए।
करियर के चुनाव में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका अनुभव विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करता है। साथ ही, यदि कोई विद्यार्थी भ्रम की स्थिति में है, तो उसे योग्य करियर काउंसलर से सलाह लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। आज साइकोमेट्रिक और एप्टीट्यूड टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता का वैज्ञानिक आकलन भी संभव है।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक योजना का है। किसी भी कॉलेज या कोर्स का चयन करने से पहले उसकी फीस, छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण की उपलब्धता और प्लेसमेंट रिकॉर्ड की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। एक अच्छी आर्थिक योजना भविष्य की अनावश्यक कठिनाइयों से बचा सकती है।
अंततः सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। सफलता का सबसे सरल सूत्र है—
रुचि + कौशल + परिश्रम + निरंतरता = सफल करियर।
प्रतिभा महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है सीखते रहने की आदत, अनुशासित जीवन और लगातार स्वयं को बेहतर बनाने का संकल्प।
आज के विद्यार्थियों के लिए पाँच बातें विशेष रूप से याद रखने योग्य हैं—कभी किसी की नकल करके करियर का चुनाव न करें; प्रतिदिन कुछ नया सीखें; अंग्रेज़ी, हिंदी और डिजिटल कौशल को मजबूत बनाएं; अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करें; तथा सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान और कौशल अर्जित करने के लिए करें।
भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। यदि हमारे युवा सही समय पर सही करियर का चुनाव करते हैं, अपनी क्षमताओं को विकसित करते हैं और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करते हैं, तो वे केवल अपना भविष्य ही नहीं, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इसलिए कक्षा 12 के बाद लिया गया निर्णय केवल अगले कॉलेज का चयन नहीं है, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय सोच-समझकर, पूरी जानकारी के साथ और अपनी वास्तविक रुचि एवं क्षमता को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।
(लेखक डॉ. शुजात अली क़ादरी शिक्षाविद्, सार्वजनिक नीति विश्लेषक तथा मुस्लिम यूथ ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (MYO) के राष्ट्रीय संयोजक हैं। वे शिक्षा, युवा विकास, भू-राजनीति और सूचना युद्ध जैसे विषयों पर नियमित लेखन करते हैं।)
