अल-बिरेह: फिलिस्तीनी कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने मंगलवार को एक अंतरराष्ट्रीय अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। इस अभियान का उद्देश्य इज़रायली हिरासत केंद्रों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों के साथ कथित यौन हिंसा के मामलों को वैश्विक स्तर पर उठाना और पीड़ितों की आवाज़ को दुनिया तक पहुंचाना बताया गया है।
इस अभियान की घोषणा अल-बिरेह म्यूनिसिपल हॉल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई। इसमें फिलिस्तीनी कैदी संगठनों, मानवाधिकार समूहों के प्रतिनिधियों और कई पूर्व बंदियों ने हिस्सा लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कुछ पूर्व बंदियों ने दावा किया कि इज़रायली हिरासत के दौरान उन्हें यौन हिंसा का सामना करना पड़ा, जिसमें बलात्कार के आरोप भी शामिल हैं।
संगठनों का कहना है कि गाजा युद्ध शुरू होने के बाद इज़रायली जेलों में फिलिस्तीनी कैदियों के साथ कथित दुर्व्यवहार में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। उनके आरोप हैं कि कई हिरासत केंद्र यातना, भूखा रखने, अपमानित करने, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना तथा यौन हिंसा जैसी घटनाओं के केंद्र बन गए हैं। उनका दावा है कि इन आरोपों का आधार सैकड़ों पीड़ितों की गवाही और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि इन घटनाओं को अलग-अलग मामलों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह एक सुनियोजित और व्यवस्थित नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य फिलिस्तीनी कैदियों की गरिमा को ठेस पहुंचाना, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ना और उन पर दबाव बनाना है।
संगठनों के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय अभियान का लक्ष्य यौन हिंसा के मुद्दे पर बनी चुप्पी को तोड़ना, पीड़ितों को सुरक्षित माहौल में अपनी आपबीती साझा करने का अवसर देना और उनकी गवाहियों को दस्तावेज़ के रूप में सुरक्षित करना है। इन बयानों को कानूनी और मानवाधिकार संस्थाओं तक पहुंचाकर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कराने की भी मांग की जाएगी।
