नाबलुस: उत्तरी वेस्ट बैंक के नाबलुस शहर में रविवार को उस वक्त बेहद दर्दनाक स्थिति सामने आई, जब इजरायली कब्जे वाली सेना द्वारा आसपास के चेकपॉइंट बंद किए जाने के कारण दो फिलिस्तीनी गर्भवती महिलाएं समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकीं। मजबूरन दोनों महिलाओं ने स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर अपनी-अपनी गाड़ियों में बच्चों को जन्म दिया।
फिजिशियंस फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, आवाजाही पर सख्त पाबंदियों, सड़कों के बंद होने और चेकपॉइंट्स पर बढ़ाई गई रोक ने महिलाओं को जरूरी चिकित्सा सुविधा तक पहुंचने से रोक दिया। अस्पताल की सुरक्षित और जरूरी चिकित्सा व्यवस्था के बजाय उन्हें बेहद मुश्किल परिस्थितियों में अपनी जान और अपने नवजात बच्चों की सुरक्षा के बीच प्रसव का सामना करना पड़ा।
संगठन ने इस स्थिति के गंभीर मानवीय असर को लेकर चिंता जताई है। उसका कहना है कि मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचने से रोकना बेहद गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। संगठन ने जोर देकर कहा कि स्वतंत्र आवाजाही और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच हर इंसान का मौलिक अधिकार है, जिसकी रक्षा की जानी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह से नाबलुस गवर्नरेट के आसपास सैन्य चेकपॉइंट्स पर सख्त पाबंदियों के कारण एंबुलेंस सेवाएं भी प्रभावित हुईं। इन प्रतिबंधों की वजह से एंबुलेंस की आवाजाही धीमी हुई और मरीजों तथा घायलों तक पहुंचने में भी देरी हुई।
फिजिशियंस फॉर ह्यूमन राइट्स ने फिलिस्तीनियों को अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचने से रोकने वाले कदमों को खत्म करने की मांग की है। संगठन ने लगातार जारी चेकपॉइंट बंदी और आवाजाही पर लगी पाबंदियों से नागरिकों के सामने पैदा हो रहे जोखिमों के लिए इजरायली कब्जे के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
