अल-अक्सा मस्जिद में बेन-ग्विर का प्रवेश, यहूदी धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर बढ़ा तनाव

यरुशलम: इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर रविवार शाम भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पूर्वी यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर में पहुंचे। खबर के अनुसार, बेन-ग्विर ने परिसर के पूर्वी हिस्से में यहूदी धार्मिक प्रार्थनाएं और अनुष्ठान किए। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यहूदी त्योहारों के दौरान अल-अक्सा परिसर में यहूदी बसने वालों के प्रवेश की घटनाएं बढ़ रही हैं। फिलिस्तीनी अधिकारियों के मुताबिक, रविवार सुबह लगभग 676 यहूदी बसने वाले इजरायली पुलिस और विशेष बलों की सुरक्षा में अल-अक्सा परिसर में दाखिल हुए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से कुछ लोगों ने परिसर के अंदर यहूदी प्रार्थनाएं और धार्मिक अनुष्ठान किए।

यॉम किप्पुर से पहले बढ़ी गतिविधियां
यह घटनाक्रम यहूदी धार्मिक त्योहारों के संवेदनशील दौर में सामने आया है। इस वर्ष रोश हशनाह 12-13 सितंबर को मनाया गया, जबकि यॉम किप्पुर 21 सितंबर को है। इसके बाद 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सुक्कोत और 3 अक्टूबर को शेमिनी अत्जेरेट तथा सिम्हत तोराह मनाया जाएगा। फिलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि इन त्योहारों के दौरान अल-अक्सा परिसर में यहूदी बसने वालों की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियां आम तौर पर बढ़ जाती हैं। यरुशलम गवर्नरेट के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के जनवरी से अगस्त के अंत तक 40,661 यहूदी बसने वाले अल-अक्सा परिसर में दाखिल हुए। अकेले अगस्त में यह संख्या 5,209 बताई गई है।

फिलिस्तीनी धार्मिक मंत्रालय ने जताई आपत्ति
फिलिस्तीनी मंत्रालय ऑफ अवकाफ एंड रिलीजियस अफेयर्स ने बेन-ग्विर के प्रवेश की निंदा की है। मंत्रालय के अनुसार, पुलिस सुरक्षा में मंत्री और बसने वालों का अल-अक्सा परिसर में प्रवेश मस्जिद की धार्मिक पवित्रता और मौजूदा व्यवस्था का उल्लंघन है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और अरब एवं मुस्लिम देशों से इजरायली अधिकारियों पर दबाव बनाने की अपील की है। मंत्रालय का कहना है कि 144-दुनम का पूरा अल-अक्सा परिसर मुसलमानों का धार्मिक स्थल है और इसे विभाजित या साझा नहीं किया जा सकता।

नेतन्याहू भी बुराक वॉल पहुंचे
बेन-ग्विर की यात्रा के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शनिवार शाम बुराक वॉल क्षेत्र में पहुंचे थे। उनके साथ कई इजरायली मंत्री और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। यह यात्रा यॉम किप्पुर से पहले यरुशलम में बढ़ी धार्मिक गतिविधियों के बीच हुई। फिलिस्तीनी पक्ष का आरोप है कि अल-अक्सा में बार-बार होने वाली ऐसी गतिविधियां वहां की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिश का हिस्सा हैं। दूसरी ओर, इजरायल में अल-अक्सा परिसर को लेकर धार्मिक और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और धार्मिक दृष्टिकोण मौजूद हैं। बेन-ग्विर इससे पहले भी अल-अक्सा परिसर में प्रवेश कर चुके हैं। 31 अगस्त को भी उनके परिसर में पहुंचने और वहां प्रार्थना करने की खबर सामने आई थी।

अल-अक्सा को लेकर फिर बढ़ा तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यरुशलम में धार्मिक त्योहारों के कारण संवेदनशीलता बढ़ी हुई है। अल-अक्सा परिसर की स्थिति लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल रही है। फिलिस्तीनी अधिकारियों को आशंका है कि लगातार होने वाली घुसपैठ और धार्मिक अनुष्ठानों से परिसर में मौजूदा स्टेटस-क्वो व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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