चीन के कब्जे में पहुंच गए थे भारतीय खुफिया एजेंट, अजीत डोभाल ने सुनाया 1975 का थर्रा देने वाला किस्सा

नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने शुरुआती खुफिया करियर का एक बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण अनुभव साझा किया है। IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए डोभाल ने बताया कि जब वह 20 के दशक में सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब सीमा क्षेत्र में भेजी गई उनकी एक खुफिया टीम चीनी सेना की हिरासत में पहुंच गई थी।

डोभाल के मुताबिक, उस समय सिक्किम भारत में विलय की प्रक्रिया से गुजर रहा था और उनकी जिम्मेदारियों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की गतिविधियों पर नजर रखना भी शामिल था। इसी दौरान उन्होंने एक टीम को सीमा क्षेत्र में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भेजा था। टीम के करीब आठ दिनों में वापस लौटने की उम्मीद थी, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी कोई सूचना नहीं मिली। बाद में मुख्यालय से फोन आया और उन्हें बताया गया कि टीम के सदस्य चीनी हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है। डोभाल ने कहा कि उस वक्त उन्हें लगा कि “यह मेरे करियर का अंत है।”

डोभाल ने बताया कि बाद में टीम के सदस्यों को रिहा कर दिया गया। घटना की जांच हुई तो सामने आया कि मिशन के लिए उपलब्ध कराए गए नक्शों और स्केच में कुछ गलतियां थीं। जांच में डोभाल को इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। उन्होंने इस घटना को अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण सीख से जोड़ते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आप कहां हैं, कहां जाना चाहते हैं और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।

डोभाल ने यह किस्सा IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साझा किया। उन्होंने अपने अनुभव के जरिए छात्रों को असफलताओं और अनिश्चित परिस्थितियों से सीख लेने का संदेश दिया।

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