ग़ाज़ा: घरों और कक्षाओं पर इसराइली हमलों के बीच आमजन ‘असुरक्षित’

मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (OCHA) ने मंगलवार को कहा कि अक्टूबर में इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम के बावजूद ग़ाज़ा में आमजन अब भी सुरक्षित नहीं हैं. इसराइली हमलों में घरों, स्कूलों और तिरपाल से बनी अस्थाई कक्षाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है.

मुख्य बिन्दु
  • ग़ाज़ा सिटी में इसराइली बलों ने मंगलवार को तम्बू में चल रही एक कक्षा पर गोलीबारी की, जिसमें छठी कक्षा का एक फ़लस्तीनी छात्र घायल हो गया.
  • बेत लाहिया में इसराइली सैनिकों ने सोमवार को कथित तौर पर घरों और एक परिसर में बचे आख़िरी स्कूल को भी ध्वस्त कर दिया.
  • पश्चिमी तट के दक्षिणी हेब्रोन में इसराइली अधिकारियों ने एक स्कूल के कुछ हिस्से ध्वस्त कर दिए. वहाँ एक हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी निवासियों पर इलाक़ा छोड़ने का दबाव है.

संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने कहा, “आज ग़ाज़ा सिटी में हमारे साझीदारों ने बताया कि तम्बू में चल रही एक कक्षा में गोली लगने से छठी कक्षा का एक छात्र घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया.”

उन्होंने ग़ाज़ा से पश्चिमी तट तक, कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में स्कूलों पर गोलीबारी और हाल में हुए हमलों पर चिन्ता जताई.

उन्होंने कहा, “अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत आमजन व नागरिक प्रतिष्ठानों की रक्षा की जानी चाहिए और उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.”

“पढ़ाई के स्थान छात्रों और शिक्षकों, दोनों के लिए सुरक्षित रहने चाहिए.”

घर और स्कूल ध्वस्त

ग़ाज़ा में दो वर्ष के युद्ध से अधिकतर इलाक़े पहले ही क्षतिग्रस्त या तबाह हो चुके हैं. अब संयुक्त राष्ट्र के साझीदार, नागरिक प्रतिष्ठानों पर नए हमलों की जानकारी दे रहे हैं.

फ़रहान हक़ ने बताया कि बेत लाहिया में इसराइली बलों ने कथित तौर पर कई घर, चार स्कूलों वाले एक परिसर में बचा आख़िरी स्कूल और लगभग एक दर्जन परिवारों को आश्रय दे रहे तम्बू ध्वस्त कर दिए.

इसके बाद मानवीय सहायता साझीदारों ने विस्थापित परिवारों के लिए मदद जुटाई है.

इसराइली सैनिकों ने आसपास सीमेंट के नए अवरोधक भी लगाए हैं. इससे प्रतिबन्धित इलाक़ा अक्टूबर के युद्धविराम में तय सीमा से आगे बढ़ गया है.

युद्धविराम के बाद से ग़ाज़ा में इसराइली हमलों में 1,209 लोग मारे गए हैं और 3,943 घायल हुए हैं.

पश्चिमी तट में स्कूल गिराए जाने का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने बताया कि क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में 80 से अधिक फ़लस्तीनी स्कूलों को गिराए जाने या उनसे सम्बन्धित आदेश जारी किए गए हैं.

दक्षिणी हेब्रोन के मसाफ़ेर यट्टा इलाक़े में इसराइली अधिकारियों ने एक स्कूल के कुछ हिस्से गिरा दिए हैं. वहाँ एक हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी निवासियों पर इलाक़ा छोड़ने का दबाव है.

फ़रहान हक़ ने कहा, “इस वर्ष अब तक हमारे शिक्षा साझीदारों ने छूटी हुई पढ़ाई पूरी कराने और छात्रों को अतिरिक्त सहायता देने वाले कार्यक्रमों के ज़रिए पश्चिमी तट में 60 हज़ार से अधिक छात्रों तक मदद पहुँचाई है.”

इन प्रयासों के तहत 30 स्कूलों की मरम्मत की गई है. अधिक जोखिम वाले इलाक़ों में 2,600 से अधिक छात्रों और शिक्षा कर्मचारियों को परिवहन व सुरक्षा सहायता दी गई है. इसके अलावा, शिक्षा के लिए नक़दी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग तथा क़ानूनी मदद भी उपलब्ध कराई गई है.

हालाँकि उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के लिए सहायता धनराशि की भारी कमी अब भी बरक़रार है.

Source : UN News

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