संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को बताया कि उत्तरी पश्चिमी तट के क़ुसरा गाँव में कई दिनों से घिरे फ़लस्तीनी परिवारों तक मानवीय सहायता पहुँच गई है. यूएन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की स्थिति को सामान्य नहीं बनने दिया जाना चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने दैनिक पत्रकार वार्ता में बताया कि पास में एक नई इसराइली बस्ती बनने और आवाजाही पर कड़े प्रतिबन्ध लगाए जाने के बाद ये परिवार कई दिनों तक अपने घरों में फँसे रहे. ज़मीनी स्तर पर काम कर रहीं यूएन की टीमें अब उन तक पहुँच गई हैं.
थोड़ी राहत
UNICEF की एक टीम ने पानी, भोजन, दवाइयाँ, स्वच्छता सामग्री और बच्चों के लिए मनोरंजन किट पहुँचाईं.
हालाँकि यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) के अनुसार, सोमवार तक गाँव में तीन फ़लस्तीनी परिवार अब भी बड़ी संख्या में मौजूद इसराइली बलों और बाशिन्दों से घिरे हुए थे.
नगर निकाय के कर्मचारियों ने पिछले सप्ताह क्षतिग्रस्त हुई पानी और बिजली की आपूर्ति भी बहाल कर दी. मगर इस दौरान उन्हें गम्भीर बाधाओं का सामना करना पड़ा.
स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि इसराइली बाशिन्दों ने कर्मचारियों पर हमला किया, जबकि इसराइली बलों ने उनमें से कुछ को हिरासत में ले लिया.
ख़बरों के अनुसार, इसराइली बलों ने पास के एक फ़लस्तीनी कारख़ाने को कामकाज बन्द करने का आदेश दिया, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हुई.
पश्चिमी तट के अन्य इलाक़ों में भी सप्ताहान्त के दौरान हिंसा की घटनाएँ सामने आईं. हेब्रॉन गवर्नरेट में दो अलग-अलग घटनाओं में कई लोग घायल हुए, जिनमें कुछ को गोली लगने से चोटें आईं. इन घटनाओं में इसराइली बल, बाशिन्दे और फ़लस्तीनी शामिल थे.
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए उप विशेष समन्वयक और मानवतावादी समन्वयक रमीज़ अलकबरोफ़ ने कहा कि पश्चिमी तट के हाल के घटनाक्रम आम लोगों की सुरक्षा, घरों और सम्पत्ति की रक्षा तथा आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने की तत्काल ज़रूरत को रेखांकित करते हैं.
इससे पहले, पिछले गुरूवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने क़ुसरा की स्थिति पर चिन्ता जताई थी. उस समय रास अल ऐन क्षेत्र में तीन फ़लस्तीनी परिवारों के क़रीब 15 लोग, जिनमें कम से कम दो बच्चे शामिल थे, अपने घरों में फँसे हुए थे और “दहशत में जी रहे थे.” इसराइली बाशिन्दों पर उनके घरों की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने का आरोप था.
OHCHR के अनुसार, ये घटनाएँ क़ुसरा में इसराइली बाशिन्दों (settlers) की बढ़ती हिंसा का हिस्सा हैं, जो नवम्बर 2025 में पास में एक चौकी स्थापित किए जाने के बाद से तेज़ हुई है.
ग़ाज़ा: हमले और आश्रय की कमी
स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि ग़ाज़ा में जारी इसराइली हमलों के आम लोगों पर पड़ रहे असर को लेकर मानवतावादी साझीदार चिन्तित हैं.
सप्ताहान्त के दौरान यूएन साझीदारों ने कई हवाई हमलों, गोलाबारी, गोलीबारी और समुद्र से किए गए हमलों की घटनाएँ दर्ज कीं. इनमें से अधिकतर घटनाएँ तथाकथित ‘येलो लाइन’ के पश्चिम में हुईं, जहाँ ग़ाज़ा की 21 लाख आबादी में से अधिकाँश लोग अब पहले के मुक़ाबले आधे से भी कम भूभाग में सिमटकर रह गए हैं.
इन हमलों में आम लोगों के भी हताहत होने की ख़बर है.
मानवतावादी साझीदारों ने चेतावनी दी है कि बारिश का मौसम नज़दीक आने के साथ तैयारियों की ज़रूरत बढ़ रही है, लेकिन वित्तीय सहायता की कमी और अन्य बाधाएँ इन प्रयासों में रुकावट बन रही हैं.
तम्बुओं की आपूर्ति पर रोक
सर्दियों से पहले संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार 30 हज़ार से भी कम तम्बू ख़रीद पाए हैं, जिनमें से अधिकाँश अब भी ग़ाज़ा के बाहर अटके हुए हैं.
अनुमान है कि ग़ाज़ा में 80 हज़ार से 1 लाख 30 हज़ार तम्बुओं की ज़रूरत है. यह संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिक टिकाऊ आश्रय सामग्री को ग़ाज़ा में लाने की अनुमति मिलती है या नहीं. फ़िलहाल ऐसी सामग्री के प्रवेश की अनुमति नहीं है.
इस वर्ष ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में मानवीय सहायता के लिए आवश्यक 4 अरब डॉलर में से अब तक 40 प्रतिशत से भी कम राशि जुटाई जा सकी है.
Source : UN News
