राष्ट्र निर्माण में मुसलमानों की भूमिका’ पर MSO और MYO का राष्ट्रीय सम्मेलन, राष्ट्र निर्माण में मुसलमानों की भूमिका पर जुटे विद्वान और युवा, एकता व सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश

नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026: मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (MSO) और मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (MYO) की ओर से “राष्ट्र निर्माण में मुसलमानों की भूमिका” विषय पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में देश के सामाजिक, राष्ट्रीय और लोकतांत्रिक विकास में भारतीय मुसलमानों की भूमिका, सूफी परंपरा, देशप्रेम, आतंकवाद के खिलाफ इस्लामी शिक्षाओं और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में लगभग 500 लोगों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत MSO के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शुजात अली क़ादरी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमानों का इतिहास देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि मुसलमान सिर्फ़ समाज का हिस्सा नहीं, राष्ट्र निर्माण के भागीदार हैं हिंदुस्तान हमारी सिर्फ़ रिहाइश की जगह नहीं है। हमारा वतन है, हमारी मिट्टी है, हमारी साझा विरासत है और हमारी आने वाली नस्लों का मुस्तकबिल है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता और सकारात्मक सोच के माध्यम से देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फारसी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अरशद-उल-क़ादरी ने “स्वतंत्रता आंदोलन में सूफियों की भूमिका” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय सूफियों ने सामाजिक एकता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी समाज में जागरूकता पैदा करने का कार्य किया।

सुन्नी दावत-ए-इस्लामी के राजस्थान चैप्टर प्रमुख अल्लामा सैयद मुहम्मद रज़वी ने “इस्लाम में मुल्क से मोहब्बत का तसव्वुर” विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम, समाज के प्रति जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों का पालन इस्लामी नैतिक मूल्यों के अनुरूप है। उन्होंने लोगों से देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने इस्लामी शिक्षाओ के माध्यम से देश प्रेम का संदेश दिया।

ऑल इंडिया तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम के चेयरमैन मुफ्ती अशफाक हुसैन क़ादरी ने “आतंकवाद पर इस्लामी शिक्षाएं” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या, हिंसा और आतंकवाद इस्लाम की मूल शिक्षाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने युवाओं से कट्टरता और हिंसक विचारधाराओं से दूर रहने तथा शांति और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

MSO के वाइस चेयरमैन मोदस्सिर अशरफी ने “सूफियों की नजर में हिंदुस्तान की हैसियत” विषय पर संबोधित करते हुए भारतीय सूफी परंपरा में देश की साझा संस्कृति, आपसी सम्मान और भाईचारे के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का संचालन MSO के नेशनल प्रेसिडेंट आरिफ वाहिदी और कंजूल ईमान पत्रिका के एडिटर मुहम्मद जफरुद्दीन बरकाती ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने विभिन्न वक्ताओं के विचारों को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की रचनात्मक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, धार्मिक विद्वान और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विविधता, गंगा-जमुनी तहजीब और साझा विरासत को मजबूत करना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

MSO और MYO ने कहा कि संगठन आगे भी शिक्षा, सामाजिक सद्भाव, राष्ट्र निर्माण, युवाओं के सशक्तिकरण और भारतीय सूफी परंपरा के सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *