संयुक्त राष्ट्र ने क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में नई अवैध इसराइली चौकियाँ बनाए जाने की ख़बरों पर गहरी चिन्ता जताई है. साथ ही, यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने इसराइल से अपने राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री के उन बयानों की स्पष्ट निन्दा करने को कहा है, जो फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ गम्भीर हिंसा को भड़का सकते हैं.
प्रमुख बिन्दु
- इसराइली अभियान के कारण पश्चिमी तट में क़रीब 40 हज़ार फ़लस्तीनी फँसे.
- इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर की टिप्पणियाँ “फ़लस्तीनियों की और अधिक ग़ैरक़ानूनी सामूहिक हत्याओं को बढ़ावा देती हैं.”
- संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की राय के अनुरूप इसराइल से बस्तियाँ बसाने की योजनाएँ रोकने का आग्रह किया.
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बुधवार को कहा कि महासचिव क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में नई अवैध इसराइली बस्तियाँ बसाए जाने की ख़बरों से बेहद चिन्तित हैं. इनमें E1 क्षेत्र में नए निर्माण की निविदाएँ भी शामिल हैं.
पिछले वर्ष मंज़ूर की गई विवादित E1 योजना के तहत इसराइली सरकार ने इस सप्ताह 1,200 से अधिक नए घरों के निर्माण के लिए निविदा जारी की है.
इस योजना से क़ब्ज़े वाले पूर्वी येरूशेलम और पश्चिमी तट के बीच सम्पर्क टूट सकता है और पश्चिमी तट उत्तर व दक्षिण में बँट सकता है. इससे क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र की भौगोलिक अखंडता पर गम्भीर असर पड़ेगा और दो-राष्ट्र समाधान के लिए बड़ा ख़तरा पैदा होगा.
महासचिव ने इसराइल से इस दिशा में आगे कोई क़दम न उठाने और संयुक्त राष्ट्र के सम्बन्धित प्रस्तावों व 19 जुलाई 2024 की अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की सलाहकारी राय के अनुरूप कार्रवाई करने का आग्रह किया है. इस राय में ग़ाज़ा पट्टी और पूर्वी येरूशेलम समेत पश्चिमी तट पर इसराइल के क़ब्ज़े को “ग़ैरक़ानूनी” बताया गया था.
पश्चिमी तट में घेराबन्दी
हेब्रॉन के दाहिरिया में बुधवार को इसराइली सैन्य अभियान शुरू होने के बाद बच्चों समेत क़रीब 40 हज़ार लोग कर्फ़्यू के कारण अपने घरों में फँसे हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय साझीदारों के अनुसार, इसराइली बलों ने कर्फ़्यू लगाया, छतों पर निशानेबाज़ तैनात किए, मिट्टी के ढेर लगाकर सड़कें बन्द कीं, गिरफ़्तारियाँ कीं और कम से कम सात फ़लस्तीनी घरों को पूछताछ केन्द्रों के रूप में इस्तेमाल किया.
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा, “इसका सीधा मानवीय असर पड़ रहा है. लोग ज़रूरी सामान नहीं जुटा पा रहे, आवश्यक सेवाओं तक नहीं पहुँच पा रहे और काम पर भी नहीं जा पा रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि घरों और परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और किसी भी सुरक्षा अभियान में अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत आम लोगों की सुरक्षा और गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए.
ग़ाज़ा में इसराइली हमले जारी
दो वर्ष तक चले इसराइल-हमास युद्ध को रोकने वाली अक्टूबर 2025 की अन्तरिम युद्धविराम योजना के बावजूद, ग़ाज़ा में लगभग हर दिन इसराइली हमले, गोलीबारी, मिसाइल प्रहार और हवाई हमले जारी हैं.
सुरक्षा मामलों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र साझीदारों ने तथाकथित “येलो लाइन” के पश्चिमी इलाक़ों में इसराइली सैन्य गतिविधियों की सूचना दी है. यह युद्धविराम के बाद इसराइल द्वारा लगाए गए रंगीन सीमेंट ब्लॉकों से बनाई गई सीमा-रेखा है.
शुरुआती स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार को ग़ाज़ा के एक बन्दरगाह पर इसराइली हवाई हमले में कम से कम सात लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए. बुधवार को भी नए हमलों की ख़बरें मिलीं.
स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा, “ऐसी घटनाएँ आम लोगों को ख़तरे में डालती हैं और सुरक्षित स्थानों, चिकित्सा सेवाओं व मानवीय सहायता तक उनकी पहुँच में बाधा डालती हैं.”
‘मानवता की सारी हदें पार’
फ़लस्तीनियों को लेकर इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर की टिप्पणियों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कड़ी आपत्ति जताई है. कार्यालय के अनुसार, ये बयान फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ ऐसी हिंसा को बढ़ावा देते हैं, जो अत्याचार अपराधों के दायरे में आ सकती है.
OHCHR ने कहा, “इसराइली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की ऐसी टिप्पणियाँ, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून, अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और मानवता के बुनियादी सिद्धान्तों के प्रति घोर अवमानना का एक और उदाहरण हैं.”
कार्यालय ने कहा, “यह मानवता की सारी हदें पार करता है.”
OHCHR के अनुसार, ये “अमानवीय टिप्पणियाँ” ऐसे समय आई हैं जब 7 अक्टूबर 2023 से ग़ाज़ा में 73,400 फ़लस्तीनी मारे गए और 1,74,312 घायल हुए हैं. ये आँकड़े फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के हैं. वहीं, क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में 1,123 फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
भड़काऊ बयानों की निन्दा करे इसराइल
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने याद दिलाया कि जनवरी 2024 में अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने दक्षिण अफ़्रीका द्वारा इसराइल के ख़िलाफ़ दायर मामले में बाध्यकारी अन्तरिम उपाय जारी किए थे. इनमें इसराइल से ग़ाज़ा में फ़लस्तीनियों के विरुद्ध जनसंहार के लिए प्रत्यक्ष एवं सार्वजनिक उकसावे को रोकने और दंडित करने के लिए हर सम्भव क़दम उठाने को कहा गया था.
OHCHR ने कहा, “ग़ाज़ा में व्यापक तबाही और पश्चिमी तट में इसराइली बाशिन्दों के लगातार हमलों व फ़लस्तीनियों के जबरन विस्थापन के बावजूद, वरिष्ठ इसराइली अधिकारियों के ऐसे बयान लगातार जारी हैं, जो फ़लस्तीनियों की और अधिक ग़ैरक़ानूनी सामूहिक हत्याओं को सही ठहराते व बढ़ावा देते हैं.”
OHCHR ने इसराइली सरकार से फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ ऐसे भड़काऊ बयानों की स्पष्ट निन्दा करने और उनकी जाँच कराने का आग्रह किया.
Source : UN News
