नई दिल्ली: भारत इस सप्ताह 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले इस सम्मेलन में BRICS के सदस्य और साझेदार देशों के नेता शामिल होंगे। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार सम्मेलन की थीम “मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” रखी गई है।
दो दिवसीय बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा होगी। भारत की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से अधिक शहरों में अब तक 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय वार्ताएं आयोजित की जा चुकी हैं। वहीं, 9-10 सितंबर को मुंबई में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक होगी। BRICS भारत को चीन और रूस के साथ संवाद बनाए रखने के साथ-साथ विकासशील एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी भूमिका मजबूत करने का मंच देता है।
भारत इस मंच के माध्यम से अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को प्रभावित किए बिना चीन और रूस के साथ भी रणनीतिक संवाद आगे बढ़ा सकता है। BRICS लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग करता रहा है, ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती आर्थिक भूमिका को इन संस्थाओं में बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।
इस सम्मेलन में शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी BRICS अध्यक्षता का इस्तेमाल निर्यात भुगतान को आसान बनाने, प्रमाणन संबंधी अड़चनों को कम करने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग बढ़ाने में कर सकता है।
