ज़िंदा लोगों का कब्रिस्तान’: पूर्व फिलिस्तीनी बंदी ने इजरायली जेलों के हालात पर उठाए गंभीर सवाल

फिलिस्तीनी बंदी

रामल्लाह: करीब दो साल तक हिरासत में रहने के बाद रिहा हुए फिलिस्तीनी पत्रकार और पूर्व बंदी रामेज़ अव्वाद ने इजरायली जेलों में फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने जेलों को “ज़िंदा लोगों का कब्रिस्तान” करार देते हुए वहां बुनियादी मानवीय गरिमा के अभाव का आरोप लगाया। रामेज़ अव्वाद, जो 27 अगस्त को रिहा हुए, ने अपनी हिरासत के अनुभव को बेहद कठिन और पीड़ादायक बताया। उनके मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्होंने “नवजात शिशु की तरह नई ज़िंदगी शुरू की हो।”

अव्वाद के अनुसार, जेल में बंद कैदियों को लगातार डर और मानसिक दबाव के बीच रहना पड़ता है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि खराब खाने के कारण कैदियों को अक्सर भूख का सामना करना पड़ता है। पूर्व बंदी ने जेलों में स्वच्छता की स्थिति को भी बेहद खराब बताया। उनका कहना है कि कैदियों को अस्वास्थ्यकर माहौल में रहना पड़ता है, जिससे उनकी तकलीफ और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। उन्होंने चिकित्सकीय सुविधाओं की कथित कमी का भी मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि बीमार कैदियों को पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं मिलती, जिसके कारण वे लगातार भय और अनिश्चितता में रहते हैं।

रामेज़ अव्वाद का यह बयान फिलिस्तीनी बंदियों की हिरासत की परिस्थितियों और उनके मानवाधिकारों को लेकर जारी व्यापक बहस के बीच सामने आया है। हालांकि, ये आरोप पूर्व बंदी के व्यक्तिगत अनुभव और Palestinian Information Center की रिपोर्टिंग पर आधारित हैं और संबंधित पक्षों के जवाब के संदर्भ में भी देखे जाने चाहिए। किसी भी संघर्ष की स्थिति में कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार और उन्हें आवश्यक चिकित्सा एवं बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का अहम हिस्सा है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच ही सच्चाई को सामने ला सकती है।

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