आबदी बानो बेग़म, जिन्हें बी अम्मा कहा जाता है, का जन्म 1852 में उत्तर प्रदेश के अमरोहा (मुरादाबाद) में हुआ। उस वक़्त औरतों के लिए पर्दा छोड़कर समाज में आगे आना नामुमकिन समझा जाता था, लेकिन बी अम्मा ने इस सोच को तोड़कर अपनी ज़िंदगी मुल्क की आज़ादी के लिए समर्पित कर दी।
वो मशहूर अज़ादी के सिपाही मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली की मां थीं। उन्होंने अपने बच्चों को ही नहीं बल्कि पूरी कौम को आज़ादी का पैग़ाम दिया। बी अम्मा ने होमरूल लीग का साथ दिया और इस तहरीक को अपने घर और मोहल्ले तक पहुंचाया। वो बैठकों में शामिल होकर जोशीली तक़रीरें करतीं और लोगों को लड़ाई के लिए हिम्मत देतीं।
1917 के कांग्रेस जलसे और 1919 के खिलाफ़त मूवमेंट में बी अम्मा की आवाज़ गूंजती रही। उनकी तक़रीरें नौजवानों में जुनून भर देती थीं। गांधी जी भी उन्हें अम्मीजान कहते थे।
13 नवंबर 1924 को बी अम्मा का इंतकाल हो गया। लेकिन उनकी बहादुरी और कुर्बानियों ने उन्हें “मदर इंडिया” बना दिया। वो इस बात की रोशन मिसाल हैं कि औरतें भी आज़ादी की जंग में बराबर की शरीक रही हैं।
