नात की दुनिया में चमकता सितारा – आयशा अब्दुल बासित

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केरल की 20 वर्षीय आयशा अब्दुल बासित आज न सिर्फ़ अपने राज्य में, बल्कि दुनिया के 80 से ज़्यादा देशों में अपनी रूहानी आवाज़ से पहचानी जाती हैं। उनकी नात और इस्लामी आध्यात्मिक ( कल्चरल ) गीत लाखों दिलों को छूते हैं। महज़ 10 साल की उम्र में जब उनके पिता ने उनके रियास के वीडियो फ़ेसबुक पर शेयर किए, तो लोगों का भरपूर प्यार मिलने लगा। इसके बाद 2013 में उनके माता-पिता ने उनका यूट्यूब चैनल शुरू किया।

आयशा की मशहूर नात “हस्बी रब्बी जल्लाल्लाह” को अब तक 8 करोड़ से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। आज आयशा के यूट्यूब चैनल पर 3.7 करोड़ से ज़्यादा सब्सक्राइबर और 5.83 करोड़ व्यूज़ हैं।

उनके करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब मशहूर नात कलाकार सामी यूसुफ़ उनके मार्गदर्शक बने और उन्होंने उनकी कंपनी के साथ अनुबंध किया। आयशा खुद मानती हैं कि यूसुफ़ का संगीत उनके लिए उपचारात्मक साबित हुआ और उसी से उन्हें आध्यात्मिकता का असली रास्ता मिला।

आयशा कहती हैं, “सामी यूसुफ़ हमेशा मुझसे कहते थे कि तुम गा नहीं रही हो, बल्कि श्रोताओं को ठीक कर रही हो।” आज वह दुनिया भर की यात्राएँ कर रही हैं और सलीम–सुलेमान जैसे संगीतकारों के साथ काम कर चुकी हैं। ख़ुद ए.आर. रहमान भी उनके प्रशंसकों में शामिल हैं।

आयशा के लिए उनका धर्म ही सबसे बड़ा सहारा और सशक्तिकरण का ज़रिया है।

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