तैय्यबा अफ़रोज़ः बिहार की पहली मुस्लिम महिला पायलट

तैय्यबा अफ़रोज़ की ज़िंदगी उन ख़्वाबों की मिसाल है, जिन्हें हिम्मत और मेहनत के पंख मिलते हैं। सोशल मीडिया बायो में वो खुद को “Pilot on Mode, Born to Fly, Dream, Achieve, Fly” लिखती हैं। और वाक़ई, उनका सफ़र इन्हीं अल्फ़ाज़ का आईना है।

सारण ज़िले के छोटे से गाँव जलालपुर की रहने वाली तैय्यबा बिहार की पहली मुस्लिम महिला हैं, जिन्होंने कमर्शियल पायलट बनने का मुकाम हासिल किया। उनके वालिद मतीउल हक़ एक छोटी किराने की दुकान चलाते थे और वालिदा शम्सुन निशा गृहिणी थीं। सीमित साधनों के बावजूद, उन्होंने बेटी के सपनों को अपनी दुआओं और हौसले से परवाज़ दी।

कम उम्र से ही तैय्यबा ने ऐलान कर दिया था कि वो जहाज़ उड़ाना चाहती हैं। यह ख्वाहिश उस माहौल में और भी बड़ी थी, जहाँ लड़कियों से ऐसे सपनों की उम्मीद तक नहीं की जाती। इंटर के बाद उन्होंने अपने वालिद को साफ़ कहा कि उनकी मंज़िल पायलट बनना है। शुरू में हैरत हुई, मगर मतीउल हक़ ने अपनी होनहार और मेधावी बेटी पर यक़ीन किया।

हालाँकि एविएशन ट्रेनिंग का ख़र्चा बेहद भारी था, मगर बेटी के जुनून ने इसे नामुमकिन से मुमकिन कर दिखाया। तैय्यबा अफ़रोज़ आज न सिर्फ़ अपने परिवार, बल्कि पूरे बिहार और मुल्क की लड़कियों के लिए उड़ते ख़्वाब की हक़ीक़त बन चुकी हैं।

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