यूक्रेन युद्ध में क्लस्टर बमों के इस्तेमाल से हुई व्यापक क्षति, अन्य देश भी चपेट में

यह लगातार तीसरा वर्ष है जब क्लस्टर बमों के इस्तेमाल से यूक्रेन में सबसे अधिक संख्या में लोग हताहत हुए हैं, जहाँ फ़रवरी 2022 में रूसी सैन्य बलों द्वारा आक्रमण किए जाने के बाद से अब तक 1,200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है या फिर वे घायल हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र समर्थित शोधकर्ताओं ने सोमवार की अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार, 2024 के दौरान विश्व भर में, क्लस्टर आयुध सामग्री से 314 लोग हताहत हुए, हालांकि वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.

क्लस्टर बम, हवा या ज़मीन से छोड़ी जाने वाली आयुध सामग्री है, जिसमें से बड़ी संख्या में छोटे-छोटे विस्फोटक निकलते हैं, जोकि सैनिकों को हानि पहुँचाने या फिर वाहनों को ध्वस्त करने के इरादे से इस्तेमाल में लाए जाते हैं.

मगर, इनके इस्तेमाल से आम नागरिकों भी बड़े पैमाने पर हताहत हुए हैं और इस वजह से इनका आलोचना की जाती रही है.

यूक्रेन में पिछले वर्ष 40 से अधिक हमलों में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें हताहतों की संख्या स्पष्ट नहीं है.

2024 के दौरान, 9 अन्य देशों—अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, लाओ पीडीआर, लेबनान, मॉरिटेनिया, म्याँमार, सीरिया, यूक्रेन, यमन—में भी इस आयुध सामग्री के इस्तेमाल से लोग हताहत हुए हैं.

क्लस्टर आयुध सामग्री पर कन्वेंशन 15 साल पहले पारित हुई थी, जिसके बाद से अब तक केवल 10 देशों ने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया है. ये सभी वही देश हैं, जोकि फ़िलहाल इस अन्तरराष्ट्रीय समझौते में शामिल नहीं है.

सोमवार को प्रकाशित नई रिपोर्ट, Cluster Munitions Monitor, को तैयार करने वाली टीम के प्रमुख लॉरेन पर्सी ने सीरिया और यमन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ मृतकों और घायलों की बड़ी संख्या होने का अन्देशा था, लेकिन इसकी पुष्टि बाद में ही हुई. 

क्लस्टर बमों की चपेट में

उन्होंने जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि लाओ लोकतांत्रिक जन गणराज्य, क्लस्टर बमों से सबसे अधिक प्रभावित, दूषित देशों में है.

यहाँ दशकों बाद पुष्टि हुई कि क्लस्टर आयुध सामग्री के इस्तेमाल से हज़ारों लोगों की या तो जान गई थी या फिर वे घायल हुए थे. 

यह अध्ययन नागरिक समाज द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जिसे यूएन निरस्त्रीकरण शोध एजेंसी (UNIDIR) का समर्थन प्राप्त है. इस रिपोर्ट में इसराइल के उन आरोपों का भी उल्लेख है, जिनमें

ईरान द्वारा जून 2025 में बैल्सिटिक मिसाइल हमलों में क्लस्टर आयधु सामग्री का इस्तेमाल होने की बात कही गई है. साथ ही, ग़ाज़ा और दक्षिणी लेबनान में भी हिंसक टकराव के दौरान इनका इस्तेमाल किया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, म्याँमार में सत्तारूढ़ सैन्य नेतृत्व ने 2022 के बाद से गृहयुद्ध के दौरान, घरेलू स्तर पर निर्मित और हवा से छोड़े जाने वाली क्लस्टर आयुध सामग्री का इस्तेमाल किया है.

चिन, राख़ीन, काचिन प्रान्तों, और साइगोन क्षेत्र में विद्रोही के क़ब्ज़े वाल इलाक़ों में स्कूलों को भी निशाना बनाया गया.

बच्चों के लिए घातक

निरस्त्रीकरण पर शोध के लिए यूएन संस्था (UNIDIR) के अनुसार, क्लस्टर आयुध सामग्री से होने वाले विस्फोट से बड़े दायरे में क्षति पहुँचती है. एक हमले में ही छोटे-छोटे हज़ारों विस्फोटक सैकड़ों मीटर के दायरे में फैलकर लोगों को जला सकते हैं, उन्हें घायल कर सकते हैं या फिर जान भी ले सकते हैं.

यूएन एजेंसी ने बताया कि इन आयुध सामग्री को हवा या फिर भूमि सतह से, बख़्तरबन्द गाड़ियों, सैनिकों को निशाना बनाकर छोड़ा जा सकता है, लेकिन ये स्पष्ट है कि आम नागरिक भी इनका दंश भुगत रहे हैं.

अतीत के वर्षों की तरह, 2024 में ऐसे हथियारों से हताहत होने वाले लोगों में 42 फ़ीसदी बच्चे हैं, चूँकि वे अक्सर खेलते हुए, स्कूलों से लौटते या फिर खेतों में काम करते समय, खिलौने जैसे नज़र आने वाली इस आयुध सामग्री की चपेट में आ जाते हैं.

धन कटौती का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, विस्फोटक हथियारों से प्रभावित देशों में इनके विरुद्ध किए जाने वाले प्रयास, सहायता धनराशि में कटौती की वजह से कमज़ोर हो रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और लेबनान में क्लस्टर बम से दूषित इलाक़ों को साफ़ करने में प्रगति हुई थी, लेकिन अब उनके पास इस कार्य के लिए धनराशि का अभाव है.

Cluster Munitions Monitor रिपोर्ट के प्रमुख लॉरेन पर्सी के अनुसार, कई कार्यक्रमों के ज़रिए दूरदराज़ के इलाक़ों में बारूदी सुरंग की चपेट में आए पीड़ितों को प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराई जाती थी. लेकिन अब इन कार्यक्रमों को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

इसके अलावा, पुनर्वास, और पीड़ितों को कृत्रिम अंग मुहैया कराए जाने पर लक्षित पहल भी प्रभावित हुई हैं.

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