ग़ाज़ा: हताश, भूख और प्यास से बेहाल परिवार, फिर से ‘अमानवीय’ विस्थापन के लिए मजूबर

ग़ाज़ा सिटी में बमबारी और धमाकों के साथ इसराइली सैन्य बलों ने अपनी सैन्य कार्रवाई तेज़ कर दी है, और इन भयावह परिस्थितियों में फँसे फ़लस्तीनी परिवार भूख व थकान से बेहाल हैं, और उत्तरी हिस्से से दक्षिणी इलाक़ों का रुख़ कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को ग़ाज़ा में मौजूदा नारकीय हालात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है.

समाचार माध्यमों के अनुसार, इसराइली सेना ने ग़ाज़ा सिटी में अपने ज़मीनी अभियान में तेज़ी लाते हुए स्थानीय निवासियों को वहाँ से चले जाने का आदेश दिया है.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता टेस इनग्रैम ने दक्षिणी ग़ाज़ा से जानकारी देते हुए कहा कि ग़ाज़ा सिटी से विशाल संख्या में फ़लस्तीनी परिवारों का सामूहिक विस्थापन एक जानलेवा ख़तरा है.

“यह अपेक्षा करना अमानवीय है कि क़रीब पाँच लाख बच्चे, जोकि 700 दिनों से अधिक समय से अनवरत टकराव से बेहाल और सदमे में हैं, वे एक नारकीय इलाक़े को छोड़कर दूसरे में चले जाएंगे.”

एक महीने में डेढ़ लाख विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता कार्यालय (OCHA) के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में, ग़ाज़ा में 70 हज़ार से अधिक लोग उत्तरी हिस्से से दक्षिणी इलाक़ों में शरण के लिए जा रहे हैं. पिछले महीने यह संख्या 1.5 लाख थी.

आवाजाही का एकमात्र उपलब्ध मार्ग अल राशिद सड़क है, जोकि बेहद व्यस्त है.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने बताया कि वह एक माँ से मिलीं, जो अपने पाँच बच्चों के साथ छह घंटे से अधिक समय तक पैदल चलकर ग़ाज़ा सिटी से दक्षिणी इलाक़े में पहुँची थी. हर कोई धूल से लथपथ, और भूख-प्यास से बेहाल था. दो बच्चों के पाँव में जूते नहीं थे.

उन्होंने कहा कि ये परिवार एक ऐसे इलाक़े में पहुँचा है, जहाँ टैंट से बने अस्थाई शिविर, गहरी निराशा ही नज़र आती है, जहाँ लाखों लोगों के लिए पर्याप्त स्तर पर आवश्यक सेवाएँ नहीं हैं.

इस बीच, ग़ाज़ा में बाल कुपोषण मामलों की संख्या में उछाल आ रहा है. यूनीसेफ़ के अनुमान के अनुसार, फ़िलहाल 26 हज़ार बच्चों को कुपोषण से उपचार की आवश्यकता है. पिछले महीने ही, ग़ाज़ा सिटी में अकाल घोषित कर दिया गया था.

खाद्य सहायता केन्द्र बन्द

यूनीसेफ़ अधिकारी ने कहा कि जगह छोड़कर चले जाने के आदेशों और सैन्य कार्रवाई में तेज़ी की वजह से ग़ाजा में और अधिक संख्या में पोषण केन्द्रों को बन्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

बच्चों के कुपोषण से बचाव के लिए फ़िलहाल जिन उपचार केन्द्रों को संचालित किया जा रहा था, उनमें से एक-तिहाई को फ़िलहाल बन्द कर दिया गया है.

यूएन मानवीय सहायताकर्मी अपने साझेदार संगठनों के साथ सक्रिय है, मगर बमबारी और सहायता पहुँचाने के अनुरोधों को नकार दिए जाने से यह कठिन होता जा रहा है.

यूएन मानवतावादी कार्यालय ने बताया कि पिछले रविवार मानवीय सहायता पहुँचाने के इरादे से 17 मिशन के लिए इसराइली प्रशासन से अनुरोध किया गया था, जिनमें से केवल चार को सहयोग मिल पाया, सात को नकार दिया गया, जबकि अन्य स्थगित करना पड़ा या फिर उनके रास्ते में अवरोध पैदा हुए.

टेस इन्ग्रैम ने कहा कि ग़ाज़ा में हताश परिवारों के सामने दुविधा है: ख़तरों वाले इलाक़े में रहें या फिर एक ऐसे स्थान जाएं जहाँ वे जानते हैं कि ख़तरा है.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि अल-मवासी में कुछ दो सप्ताह पहले हुए हमले में आठ बच्चों की जान गई थी, जब वे पानी भरने के लिए एकत्र हुए थे. इनमें तीन साल का एक बच्चा भी था.

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