यमन में लगातार जारी हिंसा और भुखमरी में दीगर बढ़ोत्तरी से, लाखों लोगों के भुखमरी का ख़तरा बढ़ गया है और पड़ोसी देशों में अस्थिरता का भी ख़तरा है. व्यापक क्षेत्रीय टकरावों से गहराई से जुड़ा यह संकट, मानवीय सहायता प्रयासों पर दबाव डाल रहा है और मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा रहा है.
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने सोमवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि यमन में उथल-पुथल को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता.
उन्होंने कहा कि यमन इस क्षेत्र की अस्थिरता का दर्पण है जिसमें वास्तविकता का व्यापक रूप नज़र आता है. क्षेत्रीय प्रतिद्वन्द्विता, सीमा पार के समीकरण और आन्तरिक विभाजन, शान्ति की दिशा में प्रगति में बाधा डाल रहे हैं.
युद्ध में चिन्ताजनक वृद्धि
हैंस ग्रुंडबर्ग ने युद्ध में ख़तरनाक उछाल की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया और आम लोगों व महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर बार-बार हो रहे हमलों का ज़िक्र किया.
हूथी उर्फ़ अंसार अल्लाह, एक दशक से भी ज़्यादा समय से, सऊदी नेतृत्व वाले गठबन्धन द्वारा समर्थित यमनी सरकार के बलों से देश पर नियंत्रण के लिए युद्धरत हैं.
उन्होंने आगाह किया कि यमन का संघर्ष पहले से ही अस्थिर क्षेत्रीय परिदृश्य में और भी उलझ रहा है.

उन्होंने कहा, “हम ग़ाज़ा में युद्ध की पृष्ठभूमि में, अंसार अल्लाह और इसराइल के बीच युद्ध में एक चिन्ताजनक और ख़तरनाक वृद्धि देख रहे हैं.” जिसमें कथित तौर पर अनेक लोग हताहत हुए हैं, और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को नुक़सान पहुँचा है.
विशेष दूत ने चेतावनी दी कि हिंसा का मौजूदा चक्र, यमन को उस शान्ति प्रक्रिया से और दूर ले जा रहा है जो स्थाई, दीर्घकालिक शान्ति और आर्थिक विकास प्रदान कर सकती है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “यह बढ़ता चक्र समाप्त होना चाहिए… हमें यमन पर फिर से ध्यान केन्द्रित करने की ज़रूरत है – इसकी आन्तरिक चुनौतियों और इसकी महान क्षमताओं को उजागर करने पर ध्यान केन्द्रित करने की.”
यमन: सबसे खाद्य असुरक्षित देश
मानवीय स्थिति भी उतनी ही भयावह है.
संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने सुरक्षा परिषद को बताया कि यमन दुनिया का तीसरा सबसे अधिक खाद्य-असुरक्षित देश बना हुआ है, जहाँ एक करोड़ 70 लाख लोग पहले से ही भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं और फ़रवरी 2026 से पहले, दस लाख और लोगों के भीषण भुखमरी की चपेट में आने की आशंका है.
उन्होंने कहा, “सत्तर प्रतिशत परिवारों के पास दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है – यह अब तक की सबसे ज़्यादा दर है.”
टॉम फ़्लैचर ने ज़ोर दिया कि पाँच में से एक परिवार, पूरा दिन बिना भोजन के गुज़ारता है, जबकि धन की कमी के कारण बीस लाख महिलाओं व लड़कियों को प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच नहीं मिल पा रही है.
यूएन के सहायता प्रयास जारी
वित्तीय कमी और चुनौतीपूर्ण परिचालन वातावरण के बावजूद, मानवीय सहायता एजेंसियाँ, यथा सम्भव, सहायता पहुँचाना जारी रखे हुए हैं.
बाढ़ से प्रभावित 1 लाख 72 हज़ार से अधिक लोगों को खाद्य पदार्थों से इतर ज़रूरी चीज़ें, आश्रय, स्वच्छता किटें और स्वच्छ पानी मुहैया कराया है.

लेकिन टॉम फ़्लैचर आगाह किया कि जारी युद्ध, बुनियादी ढाँचे को नुक़सान और संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों की नज़रबन्दी से, सहायता कार्यों के संचालन में गम्भीर बाधाएँ खड़ी हो रही हैं.
अंसार अल्लाह समूह ने हाल ही में, 22 संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया है; हालाँकि एक कर्मचारी को रिहा कर दिया गया, लेकिन 40 से ज़्यादा लोग अब भी हिरासत में हैं, जिनमें एक यूएन स्टाफ़ भी शामिल हैं जिनकी हिरासत में रहते हुए ही, कुछ समय पहले मृत्यु हो गई.
संवाद की तत्काल आवश्यकता
दोनों शीर्ष यूएन अधिकारियों ने बातचीत और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के पालन की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया.
विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने यमनी नेताओं से एकतरफ़ा कार्रवाई से पीछे हटने और राष्ट्रव्यापी युद्धविराम, आर्थिक सुधारों व समावेशी राजनैतिक भागीदारी को आगे बढ़ाने का आग्रह किया.
टॉम फ़्लैचर ने हिरासत में लिए गए सभी सहायता कर्मियों की तत्काल रिहाई और एक सुरक्षित संचालन वातावरण का आहवान किया, और चेतावनी दी कि धन में कटौती और युद्ध सम्बन्धी बाधाओं के कारण लोगों की जानें जा रही हैं.
उन्होंने कहा, “मानवीय सहायता कर्मचारियों को हिरासत में लेने से, यमन के लोगों को कोई मदद नहीं मिलती. इससे न तो भूखे लोगों को खाना मिलता है, न ही बीमारों का इलाज किया जा सकता है और न ही, बाढ़ या लड़ाई से विस्थापित लोगों की रक्षा की जा सकती है.”
“यमन के लोगों को, चाहे वे कहीं भी रहते हों, ज़रूरी मानवीय सहायता मिलनी ही चाहिए. वे बेहतर सुरक्षा, न्याय और अवसरों से भरे भविष्य के हक़दार हैं.”
Source: UN News Hindi
