गाज़ा सिटी:
गाज़ा सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स ने इज़राइल पर गंभीर आरोप लगते हुए कहा है कि वह स्थानीय हथियारबंद गिरोहों के सहारे गाज़ा में खौफ़ और अराजकता फैला रहा है।
स्वास्थ्यकर्मियों का अपहरण :
दरअसल 18 सितंबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्रालय के चार कर्मचारियों को शेख रदवान क्लिनिक से उपकरण निकालते समय गिरोह ने अगवा कर लिया। इज़रायली अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की अनुमति के बावजूद इन कर्मचारियों को हाथ बाँधकर, मोबाइल छीनकर कई घंटों तक इज़रायली सेना के कब्जे वाले इलाके में बंधक बनाए रखा गया।
गंदे मिशनों के लिए गिरोह का इस्तेमाल:
इसके अलावा सेंटर ने यह भी बताया कि इज़राइल गाज़ा के कुछ लोगों को भूख और हिंसा के दबाव में भर्ती कर इन गिरोहों में शामिल कर रहा है। और इन्हें सेना से हथियार और ट्रेनिंग मिल रही है। सिर्फ इतना ही नहीं गिरोह अपहरण, राहत ट्रकों की लूट, घरों पर जासूसी और भीड़ पर गोलीबारी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
नेतन्याहू की स्वीकारोक्ति
संगठन ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद “अबू शबाब गैंग” के गठन की बात मान चुके हैं, जिसे “पॉपुलर फोर्सेज” और “पलस्तीनियन काउंटर टेरर यूनिट” कहा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
मानवाधिकार केंद्र ने कहा कि इज़राइल इन अपराधों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उसने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि गिरोहों की फंडिंग और हथियारों की सप्लाई रोकी जाए और दोषियों को सज़ा दी जाए।
