संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित, ग़ाज़ा शान्ति योजना का स्वागत किया है और सभी पक्षों से इसके लिए सहमति जताने का आग्रह किया है. ख़बरों के अनुसार, हमास ने इस 20 सूत्री अमेरिकी योजना पर फ़िलहाल कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है, वहीं इसराइल और वृहद अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने इसका समर्थन किया है.
बताया गया है कि इसराइल और अमेरिका द्वारा की गई घोषणा से पहले, हमास नेतृत्व से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया, हालांकि क़तर और मिस्र ने बाद में सोमवार को इसकी जानकारी पहुँचाई थी.
यूएन प्रवक्ता ने महासचिव की ओर से मंगलवार को एक वक्तव्य जारी किया, जिसमें उन्होंने शान्ति योजना के लिए अरब और मुस्लिम देशों द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की है.
“अब यह अहम है कि सभी पक्ष इस समझौते और उसे लागू करने के लिए प्रतिबद्धता जताएं.”
महासचिव गुटेरेश के अनुसार, अब प्राथमिकता 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हुए हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध से बेहाल फ़लस्तीनी आबादी तक सहायता पहुँचाना होगा, ताकि उनकी पीड़ा को कम किया जा सके.
यूएन प्रमुख ने तुरन्त, स्थाई युद्धविराम लागू करने, मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए बेरोकटोक रास्ता मुहैया कराने और सभी बन्धकों की बिना शर्त रिहाई की अपील दोहराई है. उन्होंने आशा जताई है कि इसके बाद दो-राष्ट्र समाधान को साकार करने के लिए भी परिस्थितियों का निर्माण हो सकेगा.
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य बलों की कार्रवाई के बीच, मंगलवार को तुरन्त युद्धविराम की पुकार दोहराई है ताकि फ़लस्तीनी आबादी की पीड़ा से राहत दिलाई जा सके.
ग़ाज़ा में सर्दी का मौसम निकट आ रहा है, और ग़ाज़ा सिटी में इसराइली सेना की भीषण कार्रवाई जारी है, जिससे बड़े पैमाने पर सामूहिक विस्थापन हो रहा है.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के प्रवक्ता रिकार्डो पिरेस ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि युद्धविराम को हासिल करना महत्वपूर्ण है, जिससे हम फिर अकाल रोकने के लिए न केवल मानवीय सहायता पहुँचा सकेंगे, जोकि अब दक्षिण में पाँव पसार रहा है, मगर साथ ही, बच्चों और परिवारों के लिए आश्रय भी सुनिश्चित कर सकेंगे.
उन्होंने चिन्ता जताई कि सर्दी के मौसम में तापमान लुढ़कने से नए प्रकार की कठिनाइयाँ पैदा होंगी, और बच्चों व उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य चुनौतियाँ भी उपजेंगी.
अल मवासी इलाक़े पर बोझ
यूनीसेफ़ के अनुसार, इसराइली सैन्य कार्रवाई के बीच आम फ़लस्तीनी ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से से दक्षिणी इलाक़ों का रुख़ कर रहे हैं. अल मवासी के तटीय इलाक़े में बड़े पैमाने पर टैंट स्थापित किए गए हैं, जिनसे वहाँ भीड़भाड़ है और लोगों के प्रवाह को नियंत्रित कर पना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.
“हम लाखों लोगों की बात कर रहे हैं, अनुमानित चार लाख विस्थापित.”
संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय (OCHA) के अनुसार, ग़ाज़ा पट्टी में केवल 18 प्रतिशत इलाक़ा ही अब विस्थापन आदेशों या सैन्यीकृत ज़ोन का हिस्सा नहीं है.
जिन लोगों ने अपने घरों को खो दिया है, उन्हें तुरन्त आश्रय की आवश्यकता है. यूनीसेफ़ ज़रूरतमन्दों तक सहायता पहुँचाने के लिए 11 हज़ार टैंट और तिरपाल को ग़ाज़ा के लिए रवाना करने की प्रतीक्षा कर रहा है.
“हम सामान को फ़िलहाल भीतर पहुँचा पाने में असमर्थ हैं.” उनके अनुसार यह दर्शाता है कि सहायता सामग्री को ग़ाज़ा में पहुँचाने के लिए मौजूदा व्यवस्था अब भी बहुत ख़राब है.
OCHA प्रवक्ता येन्स लार्क ने भी क्षोभ व्यक्त किया कि ग़ाज़ा के भीतर मानवीय सहायता वितरित करने के लिए राहतकर्मियों के पास पर्याप्त क्षमता नहीं है. कुछ राहत सामग्री को लाने में मदद मिली है, और सामुदायिक रसोई में आपूर्ति की गई है.
बीते रविवार को, 137 रसोइयों के ज़रिए 6.60 लाख आहार तैयार किए गए और फिर उन्हें लोगों तक पहुँचाया गया.
सहायता अनुमति में कठिनाई
लेकिन मानवीय सहायता अभियान में स्थिरता नहीं है. कभी ये प्रयास सफल होते हैं, कभी इसकी अनुमति को नकार दिया जाता है.
यूएन मानवतावादी कार्यालय के अनुसार, रविवार को, जिन सहायता अभियानों में इसराइली सेना के साथ समन्वय की आवश्यकता थी, उनमें से 40 फ़ीसदी को नकार दिया गया.
प्रवक्ता येन्स लार्क ने बताया कि “हाल के दिनों में जो राहत सामग्री आई… उसे ट्रकों से हताश लोगों और कुछ मामलों में हथियारबन्द गुटों ने उठा लिया.”
उन्होंने वर्तमान स्थिति को अराजक क़रार दिया और कहा कि युद्धविराम को जल्द से जल्द लागू किए जाने की आवश्यकता है, ताकि उपयुक्त स्तर पर, समन्वित ढंग से सहायता अभियान को शुरू किया जा सके.
Source: UN News Hindi
