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इस सप्ताह ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट में, मुँह पर मास्क या नक़ाब पहने हुए तथाकथित यहूदी बाशिन्दों की भीड़ ने, फ़लस्तीनी लोगों के घरों व सम्पत्तियों पर में आगज़नी वाले हमले किए हैं.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय – OHCHR ने इन आग हमलों को घिनौने बताते बहुए इनकी कड़ी निन्दा की है और कहा है कि ये हमले, फ़लस्तीनी लोगों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा के एक बड़े चलन का हिस्सा हैं.
इन हमलों में अनेक लोगों के घायल होने की ख़बरे हैं. इनमें एक डेयरी फ़ैक्टरी पर छापा मारा गया है और सामान से भरे ट्रकों व घरों में आग लगाई गई है.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि फ़लस्तीनी लोगों के विरुद्ध हिंसा में यह बढ़ोत्तरी ऐसे समय देखी जा रही है जब इसराइली अधिकारियों ने भी, फ़लस्तीनी लोगों के घरों को गिराने की गतिविधियाँ तेज़ कर दी हैं.
इसके अलावा इसराइली बाशिन्दों और सेना ने, फ़लस्तीनी लोगों की सम्पत्तियों पर क़ब्ज़ा करने की गतिविधियाँ बढ़ाई हैं और हज़ारो लोगों को उनके स्थानों से जबरन बेदख़ल कर दिया है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार अधिकारियों ने दोहराया है कि इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट पर, अपनी सम्प्रभुता का दावा करना और वहाँ के कुछ इलाक़ों को हड़पने की कोशिश करना, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है और इस उल्लंघन की पुष्टि अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) भी कर चुका है.
उधर ग़ाज़ा में शुक्रवार को हुई भारी वर्षा से आई बाढ़ में सैकड़ों तम्बू और अस्थाई आश्रय स्थल बह गए.
न्यूयॉर्क में यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने शुक्रवार को यह डर भी व्यक्त किया कि हज़ारों विस्थापित परिवार, इन कठिन मौसम परिस्थितियों में जोखिम भरे हालात में रहने को विवश होंगे. ऐसे में उनके स्वास्थ्य और संरक्षण के बारे में भी चिन्ताएँ व्यक्त की गई हैं.
यूएन साझीदार, प्रभावित लोगों को आश्रय स्थल मुहैया कराने में सक्रिय हैं. डेयर अल बलाह और ख़ान यूनिस इलाक़ों में, गुरूवार को लगभग एक हज़ार तम्बू वितरित किए गए.
रविवार और बुधवार के बीच, साझीदार एजेंसियों ने, 1,800 से अधिक घरों को, 7 हज़ार से अधिक कम्बल मुहैया कराए है.
यूएन सहायता साझीदारों ने ज़ोर देकर कहा है कि ग़ाज़ा में बाढ़ की रोकथाम के लिए जिन साधनों और उपकरणों की ज़रूरत है, वो वहाँ उपलब्ध नहीं है. इनमें तम्बुओं से पानी को बाहर निकालना और ठोस कूड़े-कचरे और मलबे को साफ़ करने के लिए उपकरणों की ज़रूरत शामिल है.
रास्तों में फँसी सहायता सामग्री
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि तम्बुओं और आश्रय बनाने के लिए बहुत ज़रूरी सामग्री जॉर्डन, मिस्र और इसराइल में फँसी हुई है, जो ग़ाज़ा में दाख़िल होने के लिए, मंज़ूरी की प्रतीक्षा कर रही है.
प्रवक्ता ने बताया कि रहन-सहन के बहुत कठिन हालात के कारण, लोग बना फटी विस्फोटक सामग्री की चपेट में आने के उच्च जोखिम का सामना कर रहे हैं, इनमें बच्चों को सबसे अधिक जोखिम है.
स्तेफ़ान दुजैरिक ने तमाम सीमा चौकियों को पूरी तरह से और लम्बी अवधि के लिए खोले जाने, तमाम ज़रूरी सहायता सामग्री को ग़ाज़ा में दाख़िल होने के लिए स्वीकृति दिए जाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया है.
Source: UN News Hindi
