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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ग़ाज़ा में अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती के लिए सुरक्षा परिषद में सोमवार को प्रस्ताव का पारित होना, वहाँ युद्धविराम को मज़बूती देने की दिशा में बढ़ाया गया एक क़दम है. उन्होंने सभी पक्षों से इस प्रस्ताव का पालन करने का आग्रह किया है
यूएन प्रवक्ता द्वारा सोमवार देर रात जारी वक्तव्य में कहा गया है कि मिस्र, क़तर, तुर्कीये, संयुक्त राज्य अमेरिका और क्षेत्रीय पड़ोसियों ने ग़ाज़ा संकट पर अपने कूटनैतिक प्रयास जारी रखे हैं. और अब अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शान्ति योजना के दूसरे चरण की ओर बढ़ने का समय है.
महासचिव गुटेरेश के अनुसार, इससे मध्य पूर्व विवाद के लिए दो-राष्ट्र समाधान को हासिल कर पाना सम्भव होगा और उसके लिए एक राजनैतिक प्रक्रिया का मार्ग भी प्रशस्त हो सकेगा.
इस क्रम में, यूएन प्रमुख ने युद्धरत पक्षों को नाज़ुक परिस्थितियों में लागू युद्धविराम का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित किया है.
7 अक्टूबर 2023 को हमास व अन्य चरमपंथी गुटों ने इसराइल पर हमले किए थे, जिसके बाद इसराइली सैन्य बलों ने बड़े पैमाने पर ग़ाज़ा में कार्रवाई की. पिछले महीने, इसराइल और हमास के बीच लड़ाई रोकने पर सहमति हुई थी.
सुरक्षा परिषद में पारित हुए प्रस्ताव में संक्रमणकालीन प्रशासन, शान्ति बोर्ड, का स्वागत किया गया है, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के पास होने की सम्भावना है.
इसके तहत, ग़ाज़ा में अस्थाई तौर पर एक स्थिरीकरण बल की तैनाती की जाएगी और मानवीय सहायता आपूर्ति के साथ वहाँ पुनर्निर्माण प्रयासों में समन्वय भी किया जाएगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने 29 सितम्बर को ग़ाज़ा में हिंसक टकराव का अन्त करने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा की थी, और सोमवार को पारित प्रस्ताव में इसका समर्थन किया गया है.
15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद में 13 सदस्यों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि चीन और रूस ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
बच्चों के समक्ष चुनौती
इस बीच, ग़ाज़ा में सहायता एजेंसियों ने ज़ोर देकर कहा है कि दो वर्षों तक हमास लड़ाकों और इसराइली सेना के बीच विध्वंसक युद्ध की वजह से सभी प्रकार की सहायता का अभाव है और आम फ़लस्तीनी बुरी तरह थक चुके हैं.
यूएन मानवीन सहायताकर्मियों ने आगाह किया है कि बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी बच्चे सर्दी के मौसम को सहन करने के लिए तैयार नहीं हैं.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के प्रवक्ता रिकार्डो पिरेस ने मंगलवार को जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि हम आशान्वित हैं कि शान्ति योजना से स्थिति बेहतर होगी.
“लेकिन ज़मीनी स्तर पर बच्चों के लिए वास्तविकता अब भी बहुत त्रासदीपूर्ण है.”
हाल के दिनों में, भीषण बारिश से अस्थाई आश्रय शिविरों में शरण लेने वाले लोगों के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं, जोकि पहले ही कई बार विस्थापन का शिकार हो चुके हैं.
यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने पत्रकारों को बताया कि हताश परिवार बयाँ न की जा सकने वाली पीड़ा को झेल रहे हैं: बच्चे ऐसे टैंट में रह रहे हैं, जहाँ पानी भर चुका है. न गर्म कपड़े हैं और न ही बिस्तर. अनेक को पर्याप्त पोषण भी नहीं मिल पा रहा है और उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो चुकी है, जिससे सर्दी के मौसम में जोखिम है.
रिकार्डो पिरेस ने कहा कि इसराइली सैन्य बलों का 50 प्रतिशत से अधिक ग़ाज़ा पर क़ब्ज़ा है और जिन इलाकों में फ़लस्तीनी आबादी ने शरण ली है, उनमें से अधिकाँश तटीय इलाक़े हैं, जहाँ बाढ़ का जोखिम अधिक है.
ज़िकिम चौकी से मिली मदद
यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने ध्यान दिलाया कि शान्ति योजना के तहत बड़े स्तर पर मानवीय सहायता आपूर्ति की भी बात कही गई है और इसलिए और अधिक मानवतावादी गलियारों को खोले जाने की ज़रूरत है.
OCHA के अनुसार, गुरूवार से रविवार के दौरान, 5,400 मीट्रिक टन सहायता को एकत्र किया गया है, जिसमें आश्रय, चिकित्सा व खाद्य सामग्री है.
क़रीब दो महीने तक बन्द रहने के बाद ज़िकिम सीमा चौकी फिर खुल गई है, और ग़ाज़ा में सहायता पहुँचाने के लिए तीन चौकियाँ हैं.
रिकार्डो पिरेस ने कहा कि ज़िकिम सीमा चौकी का खुलना अहम है, जिससे बड़ी मात्रा में पौष्टिक बिस्किट वहाँ भेजने में मदद मिली है, लेकिन अभी और बड़े स्तर पर यह किए जाने की आवश्यकता है.
Source: UN News Hindi
