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ग़ाज़ा में पत्रकारों को उन्हीं जोखिमों व वास्तविकताओं का सामना करना पड़ रहा है, जिन कठिनाइयों से वहाँ आम फ़लस्तीनी जूझ रहे हैं, और जिनकी व्यथा को वे दुनिया के सामने लाते हैं: विस्थापन, अकाल व मौत. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने सोमवार को एक मीडिया सेमिनार के लिए अपने सन्देश में क्षोभ जताया कि 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर भयावह हमलों के बाद से अब तक ग़ाज़ा व क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में 260 मीडियाकर्मी मारे जा चुके हैं.
मध्य पूर्व में शान्ति के मुद्दे पर सोमवार को यूएन के वैश्विक संचार विभाग द्वारा आयोजित अन्तरराष्ट्रीय मीडिया सेमिनार की थीम थी: अवरोधों को तोड़ना, ग़ाज़ा व पश्चिमी तट से रिपोर्टिंग में ख़तरों व जटिलताओं का सामना.
यूएन वैश्विक संचार विभाग की अवर महासचिव मेलिसा फ़्लेमिंग ने कहा कि यह बातचीत बहुत सामयिक है और बेहद ज़रूरी भी है.
ग़ाज़ा व क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में हाल के समय में 260 से अधिक मीडियाकर्मी मारे जा चुके हैं, और पिछले कई दशकों में यह पत्रकारों के लिए सबसे जानलेवा हिंसक टकराव साबित हुआ है.
मेलिसा फ़्लेमिंग ने कहा कि यह सेमिनार विचार करने का एक अवसर है कि इसराइल और फ़लस्तीन में पत्रकारिता, विशेष रूप से ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में, किस तरह से रणक्षेत्र और जीवनरेखा में तब्दील हो गई है.
वैश्विक संचार विभाग की प्रमुख ने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के एक सन्देश को पढ़ा, जिसमें उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में पत्रकार उन्हीं जोखिमों व वास्तविकताओं – विस्थापन, अकाल, मौत — का सामना कर रहे हैं, जोकि वहाँ के आम लोग करते हैं, और जिनकी वे कवरेज करते हैं.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि युद्ध के नियम स्पष्ट हैं: आम लोग व नागरिक प्रतिष्ठान निशाना नहीं हैं, और पत्रकारों को अपना आवश्यक कार्य बिना किसी हस्तक्षेप, डराने-धमकाने या किसी नुक़सान के बिना करने में समर्थ होना चाहिए.
महासचिव ने कहा कि ग़ाज़ा में अन्तरराष्ट्रीय पत्रकारों के पहुँचने पर थोपी गई पाबन्दी अस्वीकार्य है.
कठिन हालात में दायित्व को निभाना
हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों ने 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमले किए, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और सैकड़ों को बन्धक बना लिया गया था.
इसके बाद, इसराइली सेना द्वारा ग़ाज़ा की पूर्ण रूप से घेराबन्दी कर दी गई और बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की शुरुआत हुई.
ग़ाज़ा में अल जज़ीरा नैटवर्क के ब्यूरो प्रमुख वईल अल-दहहोह ने बताया कि उस दौरान जल आपूर्ति, बिजली, संचार व इन्टरनैट सेवा पूरी तरह ठप कर दी गई थी. इसके बावजूद, पत्रकारों ने बमबारी, निजी क्षति, विस्थापन, ज़रूरी सेवाओं की क़िल्लत के बीच अपने कामकाज को जारी रखा.
उन्होंने अपने वीडियो सन्देश में कहा कि “हमें आपके लिए, पूरी दुनिया के लिए इतनी अधिक ज़िम्मेदारियों का एहसास हुआ.”
उनके अनुसार, यदि उन्होंने अपने दायित्व को नहीं निभाया होता, तो दुनिया यह नहीं देख पाती कि
“इसराइली जनसंहार के परिणामस्वरूप” यहाँ 20 लाख लोगों के साथ क्या हो रहा था.
संरक्षण व जवाबदेही
पत्रकारों की रक्षा के लिए समिति की मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोडी गिन्सबर्ग ने ग़ाज़ा में पत्रकारों के संरक्षण और स्वतंत्र आवाजाही पर बल दिया. साथ ही, जवाबदेही तय किया जाना अहम होगा.
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में अन्तरराष्ट्रीय पत्रकारों को अनुमति देना, फ़लस्तीनी पत्रकारों पर कोई सवाल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मानक है, जिस पर हमें ज़ोर देना चाहिए, और फ़लस्तीनी पत्रकारों के लिए समर्थन भी.
फ़लस्तीनी पत्रकारों के सिंडीकेट के प्रमुख नासेर अबू बक्र ने बताया कि ग़ाज़ा में अब तक 255 से अधिक पत्रकारों की जान जा चुकी है और 500 से अधिक घायल हुए हैं.
इसराइल ने 200 मीडियाकर्मियों को गिरफ़्तार किया है और उन्हें जेल में यातना दिए जाने के आरोप लगे हैं. पत्रकारों के रिश्तेदारों को भी मारे जाने या फिर निशाना बनाए जाने के आरोप लगे हैं.
नासेर अबू बक्र ने कहा कि उनका सिंडीकेट और अन्तरराष्ट्रीय पत्रकार संघ, यूएन महासचिव के साथ सहयोग के लिए तैयार है, ताकि ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में पत्रकारों के विरुद्ध अंजाम दिए गए अपराधों पर एक रिपोर्ट पेश की जा सके.
यूएन महासचिव ने अपने सन्देश में मध्य पूर्व विवाद के हल के लिए दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपने संकल्प को दोहराया और कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने और आम सहमति बनाने में, पत्रकारों की अहम भूमिका है.
Source: UN News
