पूर्वी येरूशलम स्थित यूएन परिसर में, ‘अनधिकृत इसराइली प्रवेश’ की कठोर निन्दा

फ़लस्तीनी शरणार्थियों की सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNRWA) ने पूर्वी येरूशलम स्थित उसके परिसर पर, इसराइली पुलिस द्वारा छापेमारी की कार्रवाई को अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के लिए एक नई चुनौती क़रार दिया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस घटना की कठोर निन्दा करते हुए, यूएन परिसरों व अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का पूर्ण सम्मान किए जाने का आग्रह किया है.

यूएन एजेंसी के महाआयुक्त फ़िलिपे लज़ारिनी ने सोशल मीडिया मंच X, पर अपने सन्देश में बताया कि सोमवार सुबह, नगरपालिका कर्मचारियों ने इसराइली पुलिस के साथ जबरन उनके परिसर में प्रवेश किया.

इस कार्रवाई के दौरान मोटरसाइकिल, ट्रक और अन्य वाहनों को भीतर लाया गया और सभी संचार माध्यमों को ठप कर दिया गया. फ़र्नीचर, सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों और अन्य सम्पत्तियों को ज़ब्त करने की बात कही गई है.

यूएन के ध्वज को उतारे जाने और उसके स्थान पर इसराइली झंडे को फहराए जाने की भी जानकारी मिली है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने एक वक्तव्य में, अनधिकृत ढंग से परिसर में प्रवेश किए जाने की इस घटना की कठोर निन्दा की है.

“यह परिसर, संयुक्त राष्ट्र का स्थल है, जिसकी अवहेलना नहीं की जा सकती है और यह किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से सुरक्षित है.”

महासचिव गुटेरेश ने इसराइल से आग्रह किया है कि UNRWA परिसरों की अभेद्यता (inviolability) को बहाल, संरक्षित व बरक़रार रखने के लिए तत्काल क़दम उठाए जाने होंगे. 

साथ ही, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों के अनुरूप भविष्य में किसी भी ऐसे क़दम से बचना होगा.

खुली बेपरवाही

यूएन एजेंसी महाआयुक्त ने कहा कि यह कार्रवाई, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश के तौर पर यूएन परिसरों की अभेद्यता का सम्मान करने, उनकी सुरक्षा के लिए इसराइल के तयशुदा दायित्वों के प्रति पूर्ण बेपरवाही है.

“ऐसा होने देना, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के लिए एक चुनौती है. एक ऐसी चुनौती, जिससे विश्व भर में हर स्थान पर यूएन की उपस्थिति के लिए एक ख़तरनाक मिसाल बन जाएगी.”

यूएन एजेंसी, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े समेत, मध्य पूर्व में 5 स्थानों पर 50 लाख से अधिक फ़लस्तीनी शरणार्थियों को स्वास्थ्य, शिक्षा समेत अन्य अहम सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रयासरत है.

7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर, हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों के हमलों और उसके बाद ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली सैन्य कार्रवाई के दौरान, यूएन एजेंसी के कामकाज के लिए कठिनाई बढ़ी हैं. 

फ़िलिपे लज़ारिनी ने बताया कि इस वर्ष में, UNRWA-विरोधी विधेयक इसराइली संसद में पारित होने के बाद से पूर्वी येरूशलम में संगठन का परिसर अब ख़ाली है.

इसराइली संसद क्नैसेट में पिछले वर्ष दो विधेयक पारित किए गए, जिनके तहत, इसराइली क्षेत्र में यूएन एजेंसी UNRWA की गतिविधियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था और प्रशासनिक एजेंसियों पर उसके साथ किसी तरह के सम्पर्क की मनाही है.

इस क़ानून से पहले, कई महीनों तक संगठन को अपनी गतिविधियों में चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. उस पर 2024 में हमले हुए, नफ़रत को उकसावा देने वाले प्रदर्शन हुए, और संगठन व कर्मचारियों को डराया धमकाया गया.

यूएन परिसर, ‘अभेद्य हैं’

महाआयुक्त लज़ारिनी ने ध्यान दिलाया कि इसराइल में घरेलू स्तर पर चाहे जो क़दम भी उठाया जाए, इस परिसर का दर्जा अब भी यूएन परिसर के तौर पर स्थापित है और यह किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त रहना चाहिए. 

इसराइल, संयुक्त राष्ट्र के विशेषाधिकार और कूटनैतिक छूट के लिए अन्तरराष्ट्रीय सन्धि में शामिल है, जिसमें यूएन परिसरों को अभेद्य माना गया है. 

दूसरे शब्दों में, इन परिसरों को तलाशी, ज़ब्त करने की कार्रवाई से, या किसी अन्य प्रकार की क़ानूनी प्रक्रिया से छूट प्राप्त है.

उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय ने ज़ोर देकर कहा है कि इसराइल का यह दायित्व है कि उसके द्वारा UNRWA और अन्य यूएन एजेंसियों के साथ सहयोग किया जाए.

UNRWA के लिए समर्थन

इस घटना से तीन दिन पहले ही, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूएन सहायता एजेंसी के अधिदेश (mandate) को तीन साल के लिए नवीनीकृत किया था.

इस प्रस्ताव के लिए हुए मतदान में, इस अधिदेश के समर्थन में 151 सदस्य देशों ने मत डाले, 14 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जबकि 10 ने विरोध में मतदान किया.

महाआयुक्त लज़ारिनी ने बताया कि शुक्रवार को हुए इस मतदान के नतीजे अटूट वैश्विक समर्थन को दर्शाते हैं. 

उनके अनुसार, यह परिणाम, विश्व भर में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के साथ व्यापक एकजुटता का परिचायक है.

यूएन एजेंसी के अधिदेश का नवीनीकरण, एक विस्थापित आबादी के लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के दायित्व को भी प्रदर्शित करता है, जोकि पिछले 75 वर्षों से अवैध क़ब्ज़े का शिकार है.

फ़लस्तीनी आबादी को अपनी मानवतावादी और मानव विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समर्थन की दरकार है, जब तक मौजूदा हालात का कोई न्यायसंगत, स्थाई समाधान हासिल नहीं हो जाता है.

Source: UN News Hindi

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