ग़ाज़ा में भीषण सर्दियों के तूफ़ानों से जूझ रही आमिना के लिए रात भर जागकर काटना किसी सज़ा से कम नहीं है. उनके परिवार के तम्बू की छत बारिश के पानी से भर जाती है और उन्हें पूरी रात जागकर उस पानी को हटाना पड़ता है, इसलिए कि कहीं वो छत, पानी के बोझ से दबकर गिर ना जाए.
आमिना के परिवार के आश्रय स्थल में ज़मीन भीगी हुई है और उनके बच्चे सो नहीं पाते हैं.
आमिना ने संयुक्त राष्ट्र की सहायता समन्वय एजेंसी (OCHA) को बताया, “हमारी स्थिति बेहद कठिन है, और हम चाहते हैं कि कोई हमारी मदद करे, कम से कम हमें ऐसा तम्बू मुहैया कराएँ, जो हमें सुरक्षित रख सके.”
आमिना की तरह लाखों अन्य लोग भी बारिश, बाढ़ और लगातार बमबारी के ख़तरे में रह रहे हैं, और उन्हें जीवन रक्षक सहायता की ज़रूरत है.
इन हालात के बीच, हाल ही में इसराइल सरकार ने दर्जनों मानवीय संगठनों पर प्रतिबन्ध लगा दिया है, जिससे लोगों तक राहत सहायता नहीं पहुँच पा रही है.
इसराइल के इस क़दम को, गुरूवार को, स्वतंत्र संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक समूह ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन क़रार दिया है.
विशेषज्ञों का कहना है, “यह रणनीति ऐसे हालात उत्पन्न करेगी, जो फ़लस्तीनी लोगों को लगातार क़िल्लत व कमी की स्थिति में धकेल देगी, उनकी सामूहिक अस्तित्व की क्षमता को ख़तरे में डालेगी और जनसंहार निरोधक कन्वेंशन का और उल्लंघन करेगी. इसे रोका जाना होगा.”
इमारतों के गिरने का ख़तरा
OCHA ने बताया कि कुल आबादी का क़रीब 40 प्रतिशत हिस्सा, यानि लगभग 8 लाख लोग अब ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जो बाढ़ के ख़तरे वाले हैं, और जहाँ सर्दियों के तूफ़ान और भारी बारिश के कारण, उनके आश्रय स्थल आवास योग्य नहीं रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता साझीदारों ने बताया किया कि गत मंगलवार तक, इन तूफ़ानों में, सैकड़ों तम्बू और अस्थाई आश्रय स्थल उजड़ गए या गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे 3 हज़ार से अधिक लोग सीधे कठोर मौसम की चपेट में आ गए.
साथ ही, ग़ाज़ा सिटी में 60 से अधिक आवासीय इमारतों के ढह जाने का ख़तरा मंडरा रहा है.
इसराइली प्रतिबन्ध…
OCHA ने बताया कि इसराइली बल, अब भी ग़ाज़ा पट्टी के आधे से अधिक हिस्से में “यैलो लाइन” के पार तैनात है, जहाँ मानवीय सहायता केन्द्रों, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे और कृषि भूमि तक पहुँच पर या तो रोक है या पूरी तरह पाबन्दी है.
OCHA के अनुसार, आवासीय इमारतों में विस्फोट और बुलडोज़र की गतिविधियाँ लगातार जारी हैं, जिसमें “यैलो लाइन” के पास या उसके पूर्वी हिस्से के क्षेत्र भी शामिल हैं.
इसके अलावा, फ़लस्तीनी लोगों के लिए समुद्र तक पहुँच पर भी रोक है, और लगातार ऐसी ख़बरें मिल रही हैं कि ग़ाज़ा के निकट फ़लस्तीनी मछुआरों को मारा जा रहा है या हिरासत में लिया जा रहा है.

लाखों डॉलर की मदद में बाधा
इसराइल द्वारा 30 दिसम्बर (2025) को, राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर घोषित किए गए नए नियम के तहत, 37 अन्तरराष्ट्रीय गै़र-सरकारी संगठनों (NGOs) को, ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में काम करने से रोक दिया गया.
31 दिसम्बर तक, लगभग 5 करोड़ डॉलर की जीवनरक्षक सहायता बाधित रही, क्योंकि युद्धविराम के बार-बार हुए उल्लंघनों के कारण, मानवीय सहायता पहुँचाने में रुकावटें आई.
यह जानकारी मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञों के समूह ने दी है. ये विशेषज्ञ यूएन कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें अपने इस काम के लिए संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं मिलता है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है, “ग़ाज़ा की स्थिति को बयान करने के लिए, अब कोई शब्द नहीं बचे हैं.”
Source: UN News Hindi
